ब्रेकिंग

रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन पर हाईकोर्ट सख्त, शासन को दी चेतावनी कहा अब जुर्माने के ढोल पोल से नही चलेगा काम, तो अदालत कड़े कदम उठाने से नही हटेगी पीछे

Spread the love

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ में चल रहे अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर राज्य सरकार और प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने पूछा कि जब माइनिंग एक्ट में कठोर दंड का प्रावधान है, तो अवैध खनन में लिप्त लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? तस्करों को कब तक जुर्माना लगा बचने का मौका दिया जाता रहेगा?
जिसकी सत्ता आती है वही लोग रेत का अवैध खनन कर मोटा मुनाफा कमाना शुरू कर देते है। यहां तो विभागीय अफसरों के नेताओ से मिलकर रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन कराने के आरोप लगते आ रहे है। नदियों से रेत गायब हो गई पर खनन माफियाओं और इस गोरखधंधे से जुड़े नेताओ का पेट नही भरा। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि अवैध रेत खनन की समस्या तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती। केवल आर्थिक दंड लगाकर उन्हें छोड़ना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि अगर अवैध खनन को रोकना है, तो दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई करनी होगी।

शासन ने दिया फ़ंडा

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि चार सदस्यीय टीम गठित की गई है, जो अन्य राज्यों का दौरा कर रेत खनन रोकने के उपायों पर रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके अलावा, अरपा नदी में प्रदूषण रोकने के लिए पुणे की एक कंपनी से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करवाई जा रही है। जवाब से असन्तुष्ट हाईकोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सिर्फ जांच कमेटी बनाने और रिपोर्ट तैयार करने से अवैध खनन नहीं रुकेगा। जब तक प्रशासनिक स्तर पर ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक माफिया नदियों को बर्बाद करते रहेंगे।


दी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी

हाईकोर्ट ने चेतावनी दी कि अब सिर्फ औपचारिक कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। सरकार को ठोस रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। यदि सरकार और प्रशासन इस मामले में ढील बरतते हैं, तो अदालत कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।

अगली सुनवाई 22 को


मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रेल को निर्धारित की गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *