
00 निगम के वैध- अवैध के जादू से मचा कौतूहल
00 400 का क्या होगा बावा, भवन शाखा से आ रही तरह-तरह की झांकी
बिलासपुर,,,, एक बार फिर निगम प्रशासन पर पक्षपात की उंगलियां उठ रही है! मामला एक कारोबारी के घर और शादी भवन का है! जिसे कभी नपवाने की धमकी तो कभी तोड़ने का नोटिस भेजकर परेशान किया जा रहा ये आरोप है! इन भवनों के मालिक का हालाकि न्यायालय ने इस पर रोक का आदेश जारी किया है!


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सवाल यह उठ रहा कि फिर ज्वाली नाला रोड पर कार्रवाई क्यो नही की जा रही, क्या यहाँ के निर्माण वैध हो गए, तोरवा – देवरीखुर्द मोड़ के पहले उस भवन जो एक मंजिल अधिक बना लिया गया इसके बाद भी निर्माणाधीन इस भवन के मालिक को नई सरकार आने के बाद भी नियमितीकरण का प्रमाण पत्र दे दिया गया उसका क्या, संजय तरण पुष्कर- नेहरू नगर गणेश चौक रोड पर सड़क किनारे नोटिस- नोटिस के बीच प्लास्टर और फिनिशिंग तक पहुच गये उस पांच मंजिला भवन का क्या जहां अंनुमति विपरीत मंजिल पर मंजिल तान दिए गये क्या ये सब वैध हो गए!
फ़ंडा साफ है! कि जिसके पास मसल पॉवर नही, पोलिटिकल पॉवर नही उन्ही पर प्रहार करो! पक्षपात का ये दाग पहले भी लग चूका है!
ज्वाली पुल के आधी अधूरी कार्रवाई का मामला जग न सही शहर और अंचल भर में जाहिर है! खुद के बस स्टैंड के पास की जमीन का मामला हो या फिर जरहाभाठा में एक व्यवसायी परिवार के विवाह भवन में बुलडोजर चलवाने तक कि चर्चा आम है! पता नही ये खबर पार्टी संगठन तक कैसे नही पहुची और यदि पहुची तो कार्रवाई क्यो नही हुई ये बड़ा सवाल है!
चर्चा इस बात को लेकर है कि किसके इशारे पर और क्यो ऐसा किया जा रहा ये सब बातें ऊपर लेबल पर पहुँचा दी गई है…
अब देखना होगा कि ऐसा आगे भी चलता रहेगा या पार्टी,संगठन, शासन-प्रशासन आगे ऐसी फजीहत न हो इसके लिए कोई पहल करेगा।
और गड़बड़ घोटाले का क्या-
हाल ही में निगम में 400 से अधिक ऐसे नक्शो के पास होने का मामला सामने आया है, जो नक्शा भेजने और निगम की भवन अनुज्ञा के लिए काम करने के लिए पंजीकृत ही नही। ये मामला तत्कालीन बाबा भूसरउँग के कार्यकाल का है, जिनके खुद के चौराहे वाले भवन निर्माण के दौरान एक इंच जगह नही छोड़ी गई, इतना ही नही भवन शाखा का धर्मदंड धारण करने वाले तत्कालीन अफसर ने भी खुद अतिरिक्त मंजिल का मिरमाBन करा डाला उसका भी कुछ नहीं….



