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ट्रिपल इंजन सरकार का डबल झटका, न मुआवजा मिला न धान बेचने टोकन, हताश किसान ने कीटनाशक गटक दी जान देने कोशिश

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0 सरकारी भोंपू और हसते खिलखिलाते किसानों के पोस्टरों की सच्चाई फिर उजागर
0 वाह रे सिस्टम इधर कीटनाशक पी उधर कट गया टोकन

बिलासपुर/ धान और किसान की राजनीति के प्रमुख केंद्र छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में धान बेचने के लिए टोकन और भारतमाला परियोजना के तहत जमीन का मुआवजा नहीं मिलने से परेशान एक अन्नदाता द्वारा कीटनाशक पीकर आत्महत्या की कोशिश वीडियो सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में हड़कम्प मच गया। इस घटना ने एक बार फिर सडेले सिस्टम और उन सरकारी दावों की पोल खोल दी जिसका प्रचार प्रसार कर तमाम खामियों को दबाने किसानों के हँसते खिलखिलाते बैनर- पोस्टर जारी कर वाहवाही लूटने को कोशिश की जा रही थी।


मामला जांजगीर- चम्पा जिले के अकलतरा थाना क्षेत्र के ग्रामग्राम सांकर का है, जानकारी के मुताबिक यहाँ के 45 वर्षीय पीड़ित किसान अनुराग सिंह चंदेल पिछले एक महीने से धान बेचने के लिए खरीदी केंद्र के चक्कर लगा रहा था, लेकिन उसे टोकन नहीं मिल पाया। इससे वह लगातार मानसिक तनाव में था। इसी तनाव में अन्नदाताता ने कीटनाशक पीने से पहले एक वीडियो बनाया, जिसमें उसने कहा कि वह शासन-प्रशासन के रवैये से परेशान है। उसने बताया कि पिछले साल भी उसका धान नहीं बिका था और इस बार भी वही स्थिति बनी हुई है। इसके अलावा भारतमाला परियोजना के तहत अधिग्रहित की गई जमीन का उचित मुआवजा भी उसे नहीं मिला।
बताया जा रहा है कि किसान के पास लगभग 40 एकड़ जमीन है और इस वर्ष उसने करीब 250 से 300 क्विंटल धान का उत्पादन किया था, लेकिन अब तक एक बार भी वह धान नही बेच सका नेशनल हाईवे-130 परियोजना के तहत उसकी लगभग 4 एकड़ जमीन भी अधिग्रहित की गई आरोप है कि इसके बदले उसे बहुत कम मुआवजा दिया गया।

कर्ज से परेशान किसान अनुराग पहले ही अपनी कुछ जमीन बेच चुका था। लगातार शिकायत के बावजूद समस्याओं का समाधान न होने से वह बेहद हताश था, जब कही कोई सुनवाई नही हुई तो इसी हताशा और मानसिक तनाव में उसने यह आत्मघाती कदम उठाया।
हालत बिगड़ने पर परिजन उसे बिलासपुर के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां उसका इलाज जारी है। घटना के बाद समिति ने टोकन भी जारी कर दिया।
अब सवाल यह उठ रहा कि क्या अन्नदाताओं के जहर पीने पर टोकन कटेगा। क्योकि जब से धान खरीदी शुरू हुई है तब से आज तक किसानों को धान बेचने में समस्या ही समस्या है जिसका निदान करने में ट्रिपल इंजन की सरकार कितनी संजीदा रही ये पूरा छत्तीसगढ़ देख रहा है।

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