
बिलासपुर/ छत्तीसगढ़ की न्यायधानी में कानून कायदे का हाल बेहाल है। लोगो ने अपने खुद के निवास को या निवेश के तौर पर रखे भवन पर कमाई के लिए ओयो हॉटल तान दिया है। इनमें से कई तो रिहायशी इलाकों में चल रहे शिकायते भी हो रही पर जिम्मेदार कार्रवाई तो दूर मुड़ी पूछी तक नही डोला रहे।
शहर में मुख्यमार्ग से लेकर गली कूचे और रिहायशी इलाकों तक में धड़ल्ले से ओयो होटल्स चल रहे है। इनमें से ज्यादातर तो नियम कायदों को ठेंगा दिखाकर चलाये जा रहे है, ये ओयो होटल्स कोई माई- बाप नही कोई देखने वाला नही
टाइप चल रहे। लोग कमाई के चक्कर मे खुद के मकान में ओयो खोलकर किराए में रह रहे या निवेश के लिए रखे भवन को ओयो के लिए किराया देकर हर माह माल झोर रहे।
ये है नियम
तय नियम के मुताबिक ओयो होटल के संचालन के लिए
0होटल लाइसेंस
0गुमास्ता लाइसेंस
0 स्टाफ का ईपीएफ
0 मीटर और सम्पत्तिकर व्यवसायिक
0खुद का पार्किंग
0कर्मचारी बीमा
0रेस्टोरेंट भी है तो इसके फ़ूड लाइसेंस
0 व्यवसायिक गैस सिलेंडर
और अग्निशामक यंत्र की व्यवस्था होनी चाहिए
0 बालिग लड़के लड़कियों को पहचान पत्र प्रस्तुत करने पर होटल देने का नियम है, पर बिलासपुर में तो हाल ही में ज्वेलर्स कारोबारी से लूट जानलेवा हमले और सुपारी किलिंग के आरोपियों तक को बिना पहचान पत्र्त के होटल में कमरा देने
पर ज्यादातर ओयो धुप्पल में चल रहे ऐसे में यदि कोई अनहोनी होती है तो जिम्मेदार कौन होगा ये बड़ा सवाल है।
बिगड़ रहा माहौल, मंडरा रहा खतरा
शहर के रिहायशी इलाकों में संचालित ओयो होटल के कारण जहाँ सम्बंधित इलाको का माहौल बिगड़ रहा, सुबह से लेकर रात तक लड़के-लडकिया होटल में मुह ढककर घुस रहे वही यौनजनित बीमारी के संक्रमण का खतरा मंडरा रहा..
