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बमबम भोले, रसीद नई है त निकल ले… ये है बिलासपुर नगर निगम में टैक्स वसूली के डिजिटल इंडिया के दावे का हाल… और तो और पार्ट पेमेंट भी अस्वीकार… करदाता जोन दफ्तर और निगम मुख्यालय के चक्कर काटने विवश

बिलासपुर / कंगाल नगर निगम के राजस्व वसूली का हाल- बेहाल है। करदाता एकमुश्त के बजाय क़िस्त में कर देने तैयार है पर उन्हें यह कहकर जोन कार्यालय और मुख्यालय विकास भवन का चक्कर कटवाया जा रहा कि पार्ट पेमेंट का ऑर्डर नही है,,, यही वजह है कि वसूली पिछड़ रही। इधर राजस्व विभाग के दावे की माने तो वित्तीय वर्ष 2026-27 में 126 करोड़ के राजस्व वसूली के टारगेट के एवज में 18 मार्च तक करीब 87- 88 करोड़ की वसूली की जा चुकी है, शेष राशि के टारगेट के लिए डोर टू कलेक्शन कराया जा रहा, कैम्प लगाए जा रहे।

उससे भी बड़ी हास्यास्पद बात ये है कि नगर निगम क्षेत्र के नए जुड़े इलाको के नागरिक खुद अपने रिहायशी / कमर्शियल परिसर का टैक्स पटाने पहुँच रहे, वे कोरोनाकाल में नौकरी या रोजगार बन्द होने के कारण अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला दे अब तक के कुल राजस्व का 50 प्रतिशत जमा करा शेष राशि का भुगतान किस्तों में करने आग्रह कर रहे तो उन्हें कभी जोन कार्यालय तो कभी निगम मुख्यालय दौड़ाया जा रहा, अंत मे यह कहकर हाथ खड़ा कर दिया जा रहा कि अभी पार्ट पेमेंट का आदेश ही नही है।

ये है हालात

नगर निगम के राजस्व विभाग के आकड़ो की माने तो शहर के 70 वार्डो में …

0आवासीय और कमर्शियल भवनों की सख्या – 1 लाख 26 हजार

0 इनसे राजस्व वसूली का टारगेट-126 करोड़

0 मार्च के महीने में अब तक वसूली 70-71 प्रतिशत

0 वसूली की राशि राशि मे- 87- 88 करोड़

औ ऐला कइथे डिजिटल इंडिया

नगर निगम के राजस्व विभाग का दावा है कि बिलासपुर नगर निगम में करदाताओं की सुविधा के लिए ऑनलाइन टैक्स भुगतान की सुविधा लागू है, पर जब करदाता कर भुगतान करने सशरीर जोन कार्यालय या निगम मुख्यालय टैक्स पटाने पहुच रहे तो उनसे पुरानी रसीद लेकर आने लौटाया जा रहा, ऐसे में छत्तीसगढ़ में डिजिटल इंडिया का हाल क्या है आप समझ सकते है। सवाल तो उठता की जब डिजिटल इंडिया का दावा किया जा रहा तो फिर रसीद का फुग्गा क्यो छोड़कर पब्लिक को हलाकान क्यो किया जा रहा।

पता नही

सीजीडीएनए ने बुधवार को निगम के राजस्व अधिकारी मनीष पात्रे से यह जानने का प्रयास किया कि कितने करदाता इस ऑनलाइन सुविधा का लाभ ले रहे, अब तक कितने करदाताओं से कितना ऑनलाइन टैक्स लिया गया है, तब बात खुलकर सामने आ गई कि इसका कोई डाटा ही नही।

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शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
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