
0 दुस्साहस इतना कि रेल मंत्रालय का फर्जी नियुक्ति पत्र भेज दिया ईमेल से

0 पहले भी पुलिस विभाग में नौकरी दिलाने फर्जी नियुक्ति पत्र का मामला आ चुका है सामने
0 मीडिया में लगातार खबरे आने और पुलिस प्रशासन की बार- बार चेतावनी के बाद भी फंस रहे लालच में
बिलासपुर। दीगर प्रान्त के ठगों ने छत्तीसगढ़ को फ्रॉड का अड्डा बना लिया है। ये हाल तब है जब पुलिस इसको लेकर लगातार जनजागरण अभियान चला सावधान कर रही है, अब आंध्रप्रदेश विशाखापटनम की माँ – बेटी द्वारा शहर के एक के एक प्राइवेट कंपनी से रिटायर सीनियर सिटीजन के बेटे को रेलवे में नौकरी लगाने का झांसा दे 15 लाख रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है, तोरवा पुलिस ने मामले में एफआईआर तक दर्ज कर लिया। दुस्साहस इतना कि ठग पार्टी ने इंटरव्यू, मेडिकल परीक्षण और राजनीतिक सिफारिश का हवाला देकर न सिर्फ 15 लाख की चपत लगाई बल्कि रेलवे मंत्रालय का फर्जी नियुक्ति पत्र भी ईमेल के माध्यम से भेजा जिससे ये उनके झांसे में आकर अपने जीवन भर की जमा पूंजी गंवा बैठे।
तमाम प्रयासों के बाद भी छत्तीसगढ़ के हालात पढ़ावत है ददा पढ़ावत है दाई तोरी निकलगे… टाइप है।
पुलिस के मुताबिक तोरवा क्षेत्र के सांई भूमि निवासी एक निजी संस्थान के रियायर्ड कर्मचारी के पास कडिब 6 साल पहले 2020 में एक महिला का कॉल आया कि वह उनके बेरोजगार बेटे से परिचित है, महिला ने अपने राजनीतिक रसूख और अफसरो से परिचय का हवाला दे रेलवे में उनके बेटे को नौकरी लगवाने के झांसा दिया, बेटे की लाइफ बनाने के चक्कर मे वह तैयार हो गए, तब बात इसके लिए रुपयों की आई रिटायर्ड कर्मचारी ने 15 लाख देने में असर्मथता जताई तो महिला ने रेट डाउन कर दिया, झांसे में आकर वे आरोपी मा-बेटी के अकाउंट में विभिन्न माध्यमो से ऑनलाइन रकम डलवाती रही, फिर अचानक 2024- 25 को ईमेल के माध्यम से रिटायर्ड कर्मी को उनके बेटे के नाम रेल मंत्रालय का फर्जी नियुक्ति पत्र भेजा जिससे ये फिर झांसे में आ गए।
किश्तों में 15 लाख रुपये तक
भुगतान करने के बाद भी जब नौकरी नही मिली तो उन्होंने
ट्रांजेक्शन के प्रमाण वाला पासबुक की प्रति, ईमेल, व्हाट्सऐप संदेश एवं फर्जी दस्तावेज जैसे साक्ष्य पेश कर तोरवा थाने मे कूटरचित दस्तावेज, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आंध्र प्रदेश विशाखापटनम निवासी आरोपी मा- बेटी इंद्राणी और एन कीर्ति के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कर लिया है।
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धोखाधड़ी का यह मामला 5-6 साल पुराना है, मामले में एफआईआर दर्ज कर
आरोपियों के बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है। आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अभय सिंह बैस टीआई, थाना तोरवा
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