
बिलासपुर / क्या पूरा सिस्टम लागू आगू बढ़े चला नोनी बाबू पढ़े चला टाइप चल रहा…? मामला राज्य के नगरीय प्रशासन मंत्री और केंद्र के आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री के शहर के सिटी आफ द हार्ट गोलबाजार के अवैध काम्प्लेक्स निर्माण का है। रात को नोटिस जारी कर सुबह गरीबो की बस्तियों पर बुलडोजर चलवाने वाले निगम प्रशासन के जिम्मेदार हाईकोर्ट के डायरेक्शन का हवाला दे रहे, जबकि हाईकोर्ट ने निगम प्रशासन को 30 दिन के अंदर प्रकरण का विधिपूर्वक निराकरण करने निर्देश दिए है, अफसर काम बंद कराने का दावा भी कर रहे फिर ऊपर एक तल्ला और कैसे तन गया, क्या डायरेक्शन में इसका उल्लेख है जब काम बंद कराने का दावा है तो फिर दीवारों पर पलस्तर, पुट्ठी और सफेदी कैसे चढ़ गई इसका जवाब उनके पास नही है। इस प्रकरण में जिम्मेदारों के हाईकोर्ट के डायरेक्शन वाले बयान पर गोलबाजार के एक करदाता व्यवसायी ने न सिर्फ अफसरो की शिक्षा- दीक्षा पर बेहद गम्भीर टिप्पणी की है बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए है..




ये है मामला



मामला गोलबाजार चौक मुख्यमार्ग और इससे लगे अमरनाथ जडी बूटी दुकान गली के निर्माणाधीन काम्प्लेक्स का है। इस काम्प्लेक्स में पिछले दिनों आगजनी हुई थी, निगम के भवन शाखा अधिकारी अनुपम तिवारी ने बताया कि आगजनी के बाद इस निर्माणाधीन भवन के मालिक ने मरम्मत का एक सादा आवेदन दे ग्रीन नेट डाल मौके पर दो मंजिला काम्प्लेक्स खडा कर दिया, कलेक्टर जनदर्शन में हुई शिकायत पर ये मामला संज्ञान में आने पर भवन शाखा से भवन निर्माता संजय दुबे पिता भागवत प्रसाद दुबे को नोटिस जारी कर काम बंद कराने और इज़के बाद निर्माणकर्ता द्वारा भवन अनुज्ञा के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के साथ ही हाईकोर्ट के डायरेक्शन का हवाला दिया….
एक तरफ जोन कार्यालय… एक तरफ निगम मुख्यालय विकास भवन, पर किसी का कोई दोष नही
ऐसा नही है कि ये शहर का इकलौता अवैध निर्माण है, शहर में कईँ ऐसे मामले है, सीजीडीएनए ने नेहरू नगर गणेश चौक – स्वीमिंग पूल रोड के 2 मंजिल के परमिशन पर 5 मंजिला निर्माण समेत अवैध निर्माण की कई खबरे प्रसारित की पर नोटिस का कागजी घोड़ा दौड़ता रहा निर्माण होता रहा… सवाल तो उठता है, क्योंकि गोलबाजार के इस निर्माणाधीन काम्प्लेक्स के एक तरफ महज 5-6 सौ मीटर दूर निगम का जोन कार्यालय और दूसरी तरफ करीब पौन- एक किलोमीटर दूर निगम मुख्यालय विकास भवन का दफ्तर है, ज़ोन कमिश्नर है इतना बड़ा अमला है, आठो जॉन में अलग – अलग भवन शाखा अधिकारी है,,,, पर कोई जिम्मेदार नही किसी का कोई दोष नही है…?
आखिर किसकी सरपरस्ती है
इस भवन निर्माता का ये पहला मामला नही है, इससे पहले भी उन्होंने पुराना बस स्टैंड- शहीद अमर जवान चौक के बीच निगम/ नजूल की जगह पर काम्प्लेक्स खड़ा करा दिया था,।
शुरुआत में जब शिकायत हुई तो सीमांकन के लिए निगम और राजस्व का अमला भी मौके पर भेज गया फिर कागजी घोड़ा दौड़ता रहा निर्माण हो गया तब इसे भी हाईकोर्ट का आदेश बता ठंडे बस्ते में डाल गला निकाल लिया गया। सवाल यह उठ रहा कि इस अवैध निर्माण को आखिर किसका संरक्षण है…
तो इनने क्या बिगाड़ा…
तत्कालीन कांग्रेस शासनकाल में भूपेश सरकार ने ऐन विधानसभा चुनाव के पहले ऐसे भवन निर्माताओं को राहत देने का ऐलान किया था, जिन्होंने बिना अनुमति या अनुमति विपरीत निर्माण करा लिया है। इसके लिए तय किया गया कि
जुलाई 2022 के पूर्व अस्तित्व में आये भवनों का नियमितीकरण तय गाइडलाइन के तहत शुल्क लेकर किया जाना है। लगभग 9000 हजार लोगों ने नियमितीकरण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। बताया गया कि इनमें से 4400 प्रकरणों को नियमित किया गया जबकि 4600 प्रकरण लटका दिए गए। नियमितीकरण में क्या कितना और कितने का खेल हुआ और 4600 प्रकरण क्यो लटका दिए गए ये भी सबको पता है… सवाल यह उठ रहा कि उनका आवेदन तो पुराना है जब नए निर्माण को नियमित करने खेल खेला जा रहा तो फिर आखिर उन 4600 आवेदकों ने क्या बिगाड़ा है, उनके निर्माण को भी वैधानिक अनुमति दी जाय चर्चा इस बात की है…
क्या के रहे विधि विशेषज्ञ, टैक्स पेयर और निगम कमिश्नर…
सीजीडीएनए की टीम ने इस मामले में गोलबाजार के एक व्यवसायी करदाता मनीष अग्रवाल, हाईकोर्ट के एक वरिष्ठ अधिवक्ता रमाकांत पाण्डेय और निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे से चर्चा की आप भी सुनिए वे क्या कह रहे…
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