
बिलासपुर। कल 8 नवंबर को नसबंदी कांड में मृत 13 महिलाओं समेत 18 मृतको की 10 वी बरसी है। खूब हल्ला धरना प्रदर्शन हुआ पर 10 साल बाद भी पीड़ित परिवारों को न्याय नही मिल सका। इसका दुष्परिणाम यह हुआ को ज्यादातर लोगों सरकारी स्वस्थ्य महकमे से विश्वास ही उठ गया।



बताया जा रहा कि कि शासकीय कैलेंडर के हिसाब से 8 नवंबर 2014 को कोटा में नसबंदी ऑपरेशन होना था पर स्वक़स्थ्य महकमे के खरतरो ने पता नही क्यो बिना किसी अनुमति के कोटा के बजाय कानन पेंडारी के सालों से बन्द और बदहाल स्व नेमीचंद जैन हॉस्पिटल परिसर में कैम्प लगा 83 महिलाओं का नसबंदी ऑपरेशन कर डाला। ऑपरेशन के बा द तबियत बिगड़ने पर महिलाओं की तबीयत बिगड़ने लगी और 13 महिलाओं व 5 पुरुषों की एक के बाद एक मौत होने लगी।



नसबंदी ओप्रेशम के बाद हुई 18 मौतों की खबर से देश विदेश के मीडिया कवरेज के लिए बिलासपुर पहुच गये। माहौल को बिगड़ता देख तत्कालीन स्वस्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए मौत की वजह सेप्टीशिमिया बताई।इधर पेंडारी कैम्प से उपयोग में लाई गई दवाइयों के सैम्पल लेकर जांच के लिए सेंट्रल ड्रग लेबोट्रीज कोलकाता(सीडीएल) भेजा गया।
श्रीराम इंस्टीट्यूट दिल्ली एवं नागपुर भेजा गया । मालूम हो कि दोनों प्राइवेट लैब है। जबकि ड्रग एक्ट के प्रावधान के अनुसार कोर्ट में सीडीएल की रिपोर्ट को ही मान्य की जाती है। इसके बाद भी राज्य शासन ने प्राइवेट लैब भेजकर अपनी गलती छिपाने की कोशिश की गई।

इसके ठीक 5 दिन बाद बिना जांच रिपोर्ट आये तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव डॉ.आलोक शुक्ला ने सिप्रोसीन टेबलेट में चूहामार दवा जिंक फास्फेट पाया जाना बता दिया । इसके 5 दिन बाद 18 नवम्बर को स्वास्थ्य संचालनालय ने राज्य न्यायालयिक प्रायोगशाला रायपुर से तीन मृत महिलाओं की बिसरा रिपोर्ट में किसी प्रकार का रासायनिक विष नहीं होने की बात कही । वही श्रीराम टेस्ट हाउस दिल्ली एवं क्वालीकेम नागपुर लैब की रिपोर्ट में सिप्रोसिन व आईब्रूफेन में समान मात्रा में जिंक फास्फेट मिलने की पुष्टि की गई ।ईसके बाद दवाइयों के सम्बंध में बीच बीच मे इसी तरह के रिपोर्ट आते रहे। मेडिकल स्पलाई एजेंसियों पर दबाब बनाया गया पर हुआ कुछ नही।

जिनके राजनीतिक रसूख थे उनहै दरकिनार कर बाकी लोगो के खिलाफ जांच और मुकदमे का दौर चलता रहा पर हुआ कुछ नही।
कांग्रेस ने भी कुछ नही किया
नसबंदी ऑंखफोड़वा नान घोटाल्स कांड के बाद 2018 में विधानसभा चुनाव हुए। कांग्रेस ने वक्त है बदलाव के नारे पर 15 साल से सत्ता में काबिज उस समय मद भाजपा सरकार को करारी शिकस्त दी पर नसबंदी कांड लाठी काण्ड समेत अन्य कांडो पर कुछ नंही किया। नतीजतन प्रदेश में मजबूत विकल्प के अभाव में 5 साल बाद 2023 में फिर भाजपा सत्तासीन हो गई।
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