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झूठ बोलते है निगम के अफसर, ये नाली का नही ठेका कंपनी के बेगारी का कचरा है

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0 करोड़ो के ठेके के बाद भी नही हो पा रहा कचरे का प्रबंधन, लड़ रहे अफसर
0 तो इसीलिए करोड़ो के ठेके के बाद भी 70-80 लाख का खप रहा डीजल- पेट्रोल

बिलासपुर। आप खुद देखिए कैसे निगम के पंप हाउस में कचरे से भरे एक नही दो ट्रैक्टर खड़े है। अब ये भी सुन लीजिये ट्रैक्टर चालक खुद बता रहा कि ये कचरा नाले- नालियों का नही बल्कि मछली मार्केट और जूना बिलासपुर का है जिसे उठवाकर मंगला के छपराभाठा में खाली करने भेजा गया था। पर वहाँ की महिला अधिकारी ने उसे वहॉ कचरा डंप करने से यह कहकर मना कर दिया कि यहाँ सिर्फ नाली का कचरा मलबा फेकना है। इससे हड़बड़ाए चालक को कुछ सुझा नही तो उसने भी कचरे से भरे ट्रैक्टर को पम्प हाउस में लाकर खड़ा कर दिया।

शासन ने बिलासपुर निगम क्षेत्र के सड़को की सफाई और धुलाई का ठेका दिल्ली के लायन्स सर्विसेज, डोर टू डोर और नुक्कड़ों के कचरे का कलेक्शन कर इस कचरे को कछार के प्लांट में पहुँचाकर इसका सम्पूर्ण निदान करने की जिम्मेदारी दिल्ली के एमएसडब्ल्यू सॉल्यूशन फर्म को दे रखा है। जिसका प्रतिटन के हिसाब से इस ठेका फर्म को भुगतान किया जा रहा। नाले नालियों की सफाई के लिए 6-7 लोकल ठेकेदारो से लगभग 1400 श्रमिक लिए गए है। फिर सवाल यह उठ रहा कि निगम का काम ही क्या है, क्या ये ठेका फर्म की निगम का अमला एक्सीवेटर डंपर और ट्रैक्टर लगाकर बेगारी कराना नही है। क्यो निगम के जिम्मेदार अफसर आम नागरिकों को जनसुविधा मुहैया कराने के बजाए
इन ठेका फर्मो और लोकल ठेकेदारो की निगम का अमला और संसाधन लगाकर बेगारी करा रहा है। क्यो इनकी बेगारी के लिए हर माह निगम प्रशासन को 70-80 लाख के डीजल- पेट्रोल की चपत लगा रहे।

टेंशन नई लेने का


ये बड़ा सवाल है- हालांकि ऊपर से नीचे तक यही चल रहा। इतना सब खुलकर सामने आने के बाद भी होना जाना कुछ नही है क्योंकि इससे भी बड़े बड़े मामले सामने आ चुके है।
शायद सन्देश भी यही है टेंशन लेने का नई मीडिया में जो चल रहा चलने दो ।


बताते है नाली का कचरा

सीजीडीएनए ने गत …. को गोड़पारा के पुराने पंडित मुन्नूलाल शुक्ला स्कूल के सामने नुक्कड़ से निगम के एक्सीवेटर और ट्रैक्टर से कचरा उठाते देखे जाने पर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी अनुपम तिवारी और जॉन क्रमांक 5 के कमिश्नर वैभव सिंह से चर्चा की थी कि जब सफाई ठेके पर है तो निगम का अमला और संसाधन लगाकर बेगारी क्यो तो दोनों ने उसे नाली का कचरा बताया। जबकि वहॉ स्कूल के बाउंड्रीवाल के पास नाली ही नही। पर आज। सोमवार को उनके बयान की सच्चाई सामने आ ही गई।

अनुपम तिवारी, स्वास्थ्य अधिकारी नगर पालिक निगम बिलासपुर

पम्प हाउस में डंप हो रहा कचरा

पता नही कैसे कचरे का खेल खेला जा रहा कायदे से ठेका फर्म को कचरे को उठाकर कछार के सेग्रिगेशन प्लांट में ले जाकर तौल कराना था। पर ठेका फर्मो पर दबाव है नही मोनिटरिंग हो नही रही इसलिए इस कचरे को यही पम्प हाउस के कोने काने में डंप करा दिया जा रहा ऐसा यहां के स्टाफ बता रहे।

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