

बिलासपुर/ मनहूसियत इस कदर है कि धान का कटोरा कहलाने वाला छत्तीसगढ़ में चावल का टोंटा पड़ गया। फ़ूड कंट्रोलर ने गुरुवार को एफसीआई तारबाहर और राजकिशोर नगर- लिंगियाडीह के वेयर हाउस का जायजा लिया तो सब फोकला फांसी मिला। यही वजह है कि दीगर प्रान्तों से चावल मंगवाकर ग्रेन एटीएम और राशन दुकानों में चावल का स्टॉक मंगवाकर अतिरिक्त आबंटन की व्यवस्था करनी पड़ी।
धान का कटोरा कहलाने वाले छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान 25.11 लाख किसानो से 139.85 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गईं खरीदी की गई धान को कस्टम मिलिंग के बाद मिलरों से लिये गए चावल को स्टेट वेयर हाउस के गोदामो में भरा जाना था पर एसीआई गोदामो में चावल का टोंटा पड़ा गया है। इसके चलते लाखो रुपये खर्च और तामझाम के साथ शुरू कराएं गए ग्रेन एटीएम में चावल खत्म हो गया पायलेट प्रोजेक्ट का भट्ठा बैठा तो बैठा, राशन दुकानों तक मे चावल का टोंटा पड़ गया।
इससे भी फजीहत की बात यह रही की धान का कटोरा कहलाने वाले छत्तीसगढ़ में चावल का टोंटा पड़ गया। छत्तीसगढ़ राज्य गठन को 25 साल हो गए 26 वी वर्षगांठ की तैयारी है पर ऐसा आज तक नही हुआ आनन- फानन में दीगर प्रांत से उधार में पहली बार चावल खरीदना पड़ा। सवाल यह उठ रहा कि चावल आखिर गया कहा, मामले में सही जानकारी के लिए 3 बार खाद्य नियंत्रक अमृत कुजर को काल किया गया परन्तु उन्होंने काल ही रिसीव नही किया और स्टेट वेयर हाउस लिंगियाडीह के सिंघल जी ने भी काल रिसीव नही किया।


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जिले में चावल की कमी है, इसलिए खाद्य नियंत्रक गुरुवार को तारबाहर और लिंगियाडीह वेयर हाउस का जायजा लेने गए थे। फिलहाल दूसरे स्टेट से चावल मंगवाकर व्यवस्था बनाई जा रही है।
राजीव लोचन तिवारी सहायक खाद्य नियंत्रक बिलासपुर



