

विलासपुर/ शहर के 4 वीआईपी वार्डो के शासकीय उचित मूल्य दुकानों के नए आवंटन के लिए उठापटक जारी है। उम्मीदवार समुद्र मंथन टाइप चकरा घूमा रहे विभागीय अधिकारी कह रहे कोई पात्रता नही विधायक की अनुशंसा पर दुकानो का आबंटन किया जाएगा।

नई दुकानों के लिए बड़ी संख्या में आवेदन एप्रोच आ रहे। नियम के मुताबिक संबंधित दुकानो के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को उस वार्ड का मूल निवासी होने की पात्रता महत्वपूर्ण है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस वार्ड में शासकीय राशन दुकान का आवेदन निकाला गया है, वहां के मूल निवासी आवेदकों को चयन प्रक्रिया में किस प्रकार पात्रता और प्राथमिकता दी जाएगी।
खासकर शहर के प्रमुख वार्डों और वीआईपी क्षेत्रों में निकलने वाली दुकानों को लेकर आवेदकों की नजरें अब खाद्य विभाग की चयन प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। आवेदकों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दुकानों का आवंटन निर्धारित नियमों और पात्रता के आधार पर पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। वहीं, चयन प्रक्रिया को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। हालांकि, किसी अधिकारी या व्यक्ति पर पैसों के लेन-देन का आरोप लगाने के संबंध में फिलहाल कोई प्रमाण सामने नहीं है, लेकिन साढ़े 3- साढ़े 3 लाख का हल्ला तो है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या संबंधित वार्ड के मूल निवासी और पात्र आवेदक को नियमों के अनुरूप दुकान का लाभ मिलता है, या चयन प्रक्रिया में एप्रोच और डहुरा वाला मापदंड प्रभावी रहता है। यही वजह है कि खाद्य विभाग की कार्रवाई और जारी होने वाली चयन सूची पर शहरवासियों की नजर बनी है को आखिर हो क्या रहा।
तो फिर चोचला क्यो…?
बताया जाता है कि राशन दुकानों के आबंटन के लिए सम्बंधित वार्ड के रहवासी को दुकान आबंटन की पात्रता इसलिए है ताकि दुकान संचालक उपभोक्ता को पहचानकर उनकी केवायसी करे, सवाल यह उठ रहा कि फिर विधायक की अनुशंसा, एप्रोच और पैसे का हल्ला क्यो और आबंटन के लिए आवेदन का चोचला क्यो…?
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नही ऐसा नही है न विधायक की अनुशंसा जरूरी है न पैसा। नियमो के तहत 10 दुकानों का आबंटन कर चुका अभी तक किसी ने आरोप नही लगाए, जिनको आबंटन नही मिलता वे आरोप लगाते है उनका आरोप लगाना स्वाभाविक है ।
अमृत कुजूर
खाद्य नियंत्रक, बिलासपुर



