

0 पैसे दे दो फायर सेफ्टी प्रमाण पत्र ले लो जैसे हालात

0 फायर बिग्रेड और सिस्टम को लगा जंग
बिलासपुर/ 5 मंजिल के आग को बुझाने का दम नही और 11 मंजिला भवन की मंजूरी दी जा रही। जमीनी हालात और भी चिंताजनक 5 से 7 लाख की आबादी वाले न्यायधानी के पास महज 6 फायर बिग्रेड और 110 के सेटअप पर 39 फायर स्टाफ कार्यरत है। नगर निगम से नगर सेना में आने के बाद सिस्टम में सुधार की उम्मीद थी जो उल्टे बैठ गई।
सबसे बड़ा सवाल ऊंची इमारतों को लेकर है। बताया जा रहा है कि मौजूदा दमकल संसाधनों की क्षमता करीब 5 मंजिल अथवा 60 फीट तक आग बुझाने की है, लेकिन शहर में 10-11 मंजिल तक की इमारतों को अनुमति दिए जा रहे। ऐसे में सवाल सीधा ये है कि यदि कोई अनहोनी या आगजनी होती है तो क्या होगा आखिर किस भरोसे पर
10-11 मंजिला भवन निर्माण की अनुमति दी जा रही।
गंदा है पर धंधा है
संवेदनशीलता इतनी कि दिल्ली और लाहौर में आगजनी होने पर बिलासपुर का प्रशासन जाग जा रहा, तीन- चार दिन तक दबाकर इसके नाम पर चेकिंग का चक्रम चलाया जाता है, होटल, हॉस्टल, हॉस्पिटल, व्यवसायिक काम्प्लेक्स और मॉल के फायर सेफ्टी ब्यवस्था की जांच का डंका बजाया जाता है। इसके नाम पर अनाप-शनाप उगाही के आरोप भी लगते रहे है, बताया जा रहा कि अब ये धंधा भी बन्द हो गया
फायर सेफ्टी सिस्टम की जांच और एनओसी का जिम्मा अब रायपुर की एक निजी थर्ड पार्टी को दे दी गई है जो अब निरीक्षण और एनओसी का कारोबार देखती है।
जंग लग गई व्यवस्था और फायर फाइटर सिस्टम को

कलेक्ट्रेट के न्यू कम्पोजिट बिल्डिंग में लगे फायर सिस्टम के हाल को देखकर इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि फायर सेफ्टी उपकरण लगवाने और इसके जांच के नाम पर कितना बड़ा मजाक चल रहा।
इन तस्वीरों में आप खुद देखिये कैसे कलेक्ट्रेट के न्यूकम्पोजिट बिल्डिंग के फायर सेफ्टी पाइप में जंग लग गया है पाइप से पपड़ी बनकर परत उधड़ रही। अस्पतालों और अन्य इमारतों में लगाये गए फायर सेफ्टी उपकरणों का कमोबेश यही हालात है। कभी आगजनी की नौबत बन जाये तो इनमें से एक भी तैयार नही। आरोप है कि सारा खेल कागजी और खानापूर्ति तक सीमित हैं।
एनओसी देने के बाद उन इमारतों की फायर सेफ्टी व्यवस्था जमीन पर वास्तव में काम कर रही है या नहीं इसकी जांच होनी चाहिए क्योकि फाइलों में लगी मुहरें आग नहीं बुझातीं।

फायर ब्रिगेड भी अपर्याप्त
नगर सेना के पास कुल 6 फायर ब्रिगेड है जिनमे से एक परमानेंट हाईकोर्ट में तैनात रहती है। यानि शहर की 5 से 7 लाख की आबादी के लिए महज 5 दमकल। तय मापदंड के मुताबिक प्रत्येक 50 हजार की आबादी पर कम से कम 1 दमकल वाहन होने चाहिए। इस हिसाब से बिलासपुर में 12 से 13 दमकल होने चाहिए पर है कितने टोटल 6 उनमें से 1 हाईकोर्ट में।
नगर सेना में जाने के बाद हो गया बण्ठाढार
नगर निगम से फायर ब्रिगेड के अमला और संसाधन समेत नगर सेना में आने के बाद उम्मीद थी कि अब 20-20,30-30 साल से यहां काम कर रहे कर्मचारियो के दिन बहुरेंगे फायर ब्रिगेड अपडेट होगा उनका वेतन बढ़ेगा परमानेंट होगा पर उल्टा हो गया। अब हालत ये है कि नगर तो उन्हें अपने से अलग कर नगर सेना को सौप चुका है पर नगर सेना उन्हें अपना मानने तैयार नही।
ये है निर्धारित मानक
आबादी के आधार परः राष्ट्रीय अग्निशमन सलाहकार (National Fire Advisory) और सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, सामान्य तौर पर 50,000 की आबादी पर एक फायर ब्रिगेड यूनिट (दमकल गाड़ी) और
लगभग 2 लाख की आबादी पर कम से कम एक पूर्ण फायर स्टेशन होना जरूरी माना गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में दमकल वाहन कम से कम समय में मौके पर पहुंच सके।
क्यों जरूरी है आबादी के हिसाब से व्यवस्था?
आगजनी के दौरान आग पर नियंत्रण और लोगो की जान बचाने हर एक सेकंड की कीमत होती है। स्टेशन पास होने पर गाड़ी जल्दी पहुंचती है और नुकसान कम होता है।
शहरों में बढ़ती आबादी और ऊंची इमारतों के कारण जोखिम बहुत बढ़ गया है, जिसके लिए पर्याप्त अमला और गाड़ियां होनी ही चाहिए।
ये है हालात
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, बिलासपुर नगर निगम के पुराने क्षेत्र की आबादी 3.30 लाख से 3.65 लाख थी। अगस्त 2019 में 15 गावो और 3 निकायों को नगर निगम में शामिल करने के बाद अब बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की वर्तमान अनुमानित आबादी वर्ष 2026 में लगभग 4.90 लाख से 6.99 लाख के बीच है।
हाईकोर्ट भी लगा चुका फटकार टेंडर नहीं जमीन पर दिखना चाहिए काम
प्रदेश की लचर फायर ब्रिगेड व्यवस्था को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने फायर सेफ्टी और दमकल गाड़ियों की खरीदी को लेकर सख्त निर्देश देते हुए कहा कि केवल टेंडर दिखाने से काम नहीं चलेगा, जमीन पर काम दिखना चाहिए। बेंच ने फायर ब्रिगेड के आधुनिक वाहनों और उपकरणों की खरीदी के लिए जारी किए गए सभी टेंडरों की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है और गृह-वित्त विभाग के सचिव को हलफनामा प्रस्तुत करने निर्देश दिये ।
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तय मापदंड के मुताबिक संसाधन और अमले के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। दमकल के साथ निगम से मिले निगम कर्मियों को भी विभाग में शामिल करने की मांग कई बार रखी जा चुकी है, जहा तक फायर सेफ्टी की जांच और सर्टिफिकेशन की बात है, शासन ने इसका कार्य रायपुर की एक संस्था को सौंपा गया है वे लोग ही कर रहे इसकी जानकारी नही है। 1 फायर अफसर है जो डेपुटेशन में यहां सेवा दे रहे, कोई भी स्टाफ बिना प्रशिक्षण के नही है, भरनी कैम्प से सभी को प्रशिक्षण दिलाया गया है।
दीपांकुर नाथ
डिस्ट्रिक कमांडेंट होमगार्ड
एवं प्रभारी फायर ब्रिगेड



