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मेला समेटकर निकल गए, मैदान की बदहाली छोड़ गए! झूले हटे, लेकिन मलबा और गड्ढे जस के तस; खिलाड़ियों का सवाल मेले की कमाई हुई, अब मैदान की सफाई की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?

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बिलासपुर,,,, साइंस कॉलेज मैदान में लगे मेले और झूलों को हटे करीब एक महीना बीत चुका है! लेकिन मेले के बाद मैदान की बदहाल स्थिति अब भी जस की तस बनी हुई है! झूले और अस्थायी ढांचे तो हटा दिए गए…. लेकिन मैदान में जगह-जगह मलबा, कचरा और गड्ढे नजर आ रहे हैं! इससे खिलाड़ियों को अभ्यास करने में बड़ी परेशानी हो रही है! मेले के आयोजन के दौरान मैदान के इस्तेमाल को लेकर पहले भी सवाल उठे थे…. 

अब मेला समाप्त होने के बाद मैदान को पूर्व स्थिति में लौटाने की जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं! खिलाड़ियों का कहना है! कि मेले से पहले मैदान क्रिकेट, स्केटिंग जैसे खेल के लिए इस्तेमाल होता था… लेकिन आयोजन समाप्त होने के बाद भी मैदान की सफाई और समतलीकरण नहीं कराया गया… मैदान में जगह-जगह पड़े मलबे और गड्ढों के कारण खिलाड़ियों को दौड़ने, अभ्यास करने और अन्य खेल गतिविधियां करने में परेशानी हो रही है!

खिलाड़ियों का कहना है! कि आयोजन के लिए मैदान का इस्तेमाल करने वाले मेला संचालक की जिम्मेदारी थी… कि आयोजन समाप्त होने के बाद मैदान की साफ-सफाई कर उसे पहले जैसी स्थिति में छोड़ा जाता… लेकिन करीब एक महीने बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है!


सबसे बड़ा सवाल यही है! कि मेले से कमाई करने के बाद मैदान की बदहाली का खामियाजा खिलाड़ी क्यों भुगतें? मैदान में छोड़ा गया मलबा और गड्ढे खेल गतिविधियों के साथ-साथ खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय बने हुए हैं!


आने वाले दिनों में नवरात्रि का पर्व भी शुरू होने वाला है! ऐसे में मैदान में दोबारा किसी आयोजन की तैयारी से पहले मौजूदा मलबा हटाना और गड्ढों को भरकर मैदान का समतलीकरण करना जरूरी है!


खिलाड़ियों ने मांग की है! कि मेले के बाद मैदान को बदहाल छोड़ने वाले आयोजक से सफाई और मरम्मत की जिम्मेदारी तय कराई जाए… साथ ही कॉलेज प्रबंधन और नगर निगम यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में किसी भी आयोजन के बाद खेल मैदान को इसी तरह बदहाल छोड़ने की स्थिति न बने…


अब देखने वाली बात यह है! कि करीब एक महीने से मैदान में पसरी अव्यवस्था पर जिम्मेदार मेला आयोजक से जवाबदेही तय होती है! या खिलाड़ी इसी बदहाल मैदान में अभ्यास करने को मजबूर रहते हैं!

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