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बिच्छू के मंतर पर सर्पदंश का जंतर, फर्जी नागलोक मुआवजा कांड को क्या… 21 गिरफ्तारियों के बाद सूंघ गया सांप…?

बिलासपुर / लगता है साढ़े 17 करोड़ के चर्चित फर्जी सर्पदंश मुआवजा कांड को 21 आरोपियो की गिरफ्तारी के बाद सांप सूंघ गया। हल्ला था कि नागलोक फर्जीवाड़े के बाद लू और बाढ़ आपदा में हुए मुआवजे के महाफ़र्जीवाड़े की भी जांच होगी पर अब सेटिंग के बैटिंग का शोर है।
उस डॉक्टर की भी चर्चा थम गई जिसके फरार होने की खबर थी।

मामले के खदबदाने के बाद से तहसील दफ्तर का कामकाज ठप पड़ गया था और अफसर भागे भागे फिर रहे थे। फाइलें खंगालकर लिस्टिंग की गई कि सर्पदंश, पानी मे डूबने, लू और किस तरह के कितने मामले है, और किन किन अफसरो के कार्यकाल में उनके दफ्तर से कितने प्रकरणों की फाइलें मुआवजे के लिए तय प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाई गई।
इसके कुछ रिकॉर्ड भी सामने आए है जिसमे इस बात का उल्लेख है कि कौन साहब, सर ने कितने प्रकरणों में चिड़िया बिठाया है।

पर कुछ ऐसा हुआ कि वातावरण ही बदल गया, अफसर दफ्तर में बैठने लगे… खबर है कि सब सैट है…

अब तक 21

  छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुए साढ़े 17 करोड़ के बहुचर्चित सर्पदंश (सांप काटने) मुआवजा घोटाले में अब तक 431 संदेहास्पद प्रकरणों में 16 एफआईआर दर्ज कर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने के आरोप में सिम्स की पूर्व महिला डॉक्टर प्रियंका सोनी, तहसील और एसडीएम दफ्तर के लिपिक रीडर नरेंद्र कौशिक, गरीब राम बिंझवार और हरिशंकर राठौर को फर्जी मामलों को ऑनलाइन सत्यापित करने और आईडी का दुरुपयोग करने,  वकील (जैसे हीरा प्रसाद खंडहर और महेंद्र कुमार), होम गार्ड (नगर सैनिक – रामकुमार पाटनवार और रामेश्वर भास्कर), बैंक कर्मचारी (कुश कुमार गुप्ता) व मामले के बताए गए मास्टर माइंड साहब के ड्राइवर और मृतको के लाभार्थी रिश्तेदार व बिचौलिए समेत 21 आरोपियो के गिरफ्तारी की खबर है।

ऐसे किया गया खेला

फर्जी मुआवजे के इस खेल को इतने शातिराने तरीके से अंजाम दिया गया कि  सामान्य बीमारी, आत्महत्या व अन्य कारणों से हुई मौतों को  सांप के काटने से हुई मौत दर्शा फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सील और राजस्व दस्तावेज तैयार कर सरकारी मुआवजे की राशि हड़पने चक्रव्यूह रचा गया।

ठीकरा साहेब के ड्राइवर पर

मामले का भंडाफोड़ होने के बाद पूरे मामले का मास्टर माइंड साहेब के उस ड्राइवर को बताया गया जो निगम का ठेका कर्मी है और जिसे साहब की गाड़ी चलाने भेजा गया है। इतना ही नही उसके बैंक खाते में लाखों का ऑनलाइन ट्रॉन्जेक्शन की बाते भी सामने आई। सवाल यह उठ रहा कि 8-10 हजार पारिश्रमिक पाने वाले ठेका श्रमिक जिन्हें 3-3, 4-4 माह पारिश्रमिक नही मिलता उसके खाते में इतना पैसा आया कहा से और जब उसके पास इतना आया तो साहबो के पास…?

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शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
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