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चुनावी दावे के गर्म राख पर फिर पक गया 1 करोड़ 40 लाख का अंगाकर रोटी, मामला नगर निगम और स्मार्ट सिटी के एक और एफडीआर कांड का…!

बिलासपुर । स्मार्ट सिटी लिमिटेड बिलासपुर के
77 लाख रुपये के एफडीआर अफरा-तफरी कांड की जांच और कार्रवाई का दावा आखिरकार चुनावी भपका साबित हुआ तो हुआ फिर 1 करोड़ 40 लाख के एक और एफडीआर कांड का हल्ला मच गया। उससे ज्यादा हल्ला कन्स्ट्रक्शन कम्पनी और प्रशासन के बीच मांडवाली कराने वाले एक नेता का है जो पूर्व मंत्री व नगर विधायक का करीबी बताया जा रहा। पूर्व मंत्री व नगर विधायक के पूर्व कार्यकाल के दौरान अलग अलग के बजाय कार्यो का पैकेज में टेंडर किया गया था। उस दौर में बस स्टैंड और रामा मैग्नेटो मॉल के पास दो दफ्तरों से ठेकेदारी और पेटीदारी का खेल चलता था।

बताया जा रहा कि जिस चर्चित कन्स्ट्रक्शन फर्म को 3 पैकेज का काम मिला उस फर्म ने पेटी में ये काम रामा मैग्नेटो मॉल के पास वाले ग्रुप को दे दिया। बताया जा रहा कि पेटी ठेकेदार ने जो काम कराया वो बनते ही उधड़ने लगे, इसके बाद पेटी कॉन्ट्रेक्टर से काम लेकर दूसरे ठेकेदारों से काम को कराया गया जो आज तक भुगतान के लिए भटक रहे।
अब खबर 8 साल बाद निगम के अफसरो व मूल ठेका फर्म के बीच मांडवाली करा 1 करोड़ 40 लाख के एफडीआर, एसडी और रॉयल्टी का माल निकालने का है, जिसमे लाखो के डीलिंग की खबरे आ रही है।
CGDNA की टीम ने जब से ये खेल शुरू हुआ तभी से इसकी पड़ताल करने सम्बंधित जोन और निगम मुख्यालय विकास भवन से जानकारी जुटाई तो पता चला कि जुलाई लास्ट और अगस्त 1st वीक में 1 करोड़ 36- 40 लाख रुपये का भुगतान कन्स्ट्रक्शन कम्पनी को किया गया गया है।

मांडवाली मांडवाल की

सवाल यह उठ रहा कि यदि सब कुछ ठीक था तो कन्स्ट्रक्शन कम्पनी का पैसा 9-10 साल तक रोककर क्यो रखा गया और यदि गलत है तो फिर मांडवाल की मांडवाली पर कन्स्ट्रक्शन कम्पनी को 1 करोड़ से अधिक के एफडीआर और उसके अन्य सत्व को राजसात करने के बजाय जारी क्यो किया गया क्योकि नियम तो यही है या फिर बदल गया।

न डर न भय बावाजी की जय

सवाल यह उठ रहा कि 3-3, 4-4 जोन के कमिश्नर आखिर
इसके लिए तैयार कैसे हो गए, कैसे और किस आधार पर 9-10 साल बाद साइट इंजीनियर ने ओके रिपोर्ट दे कामो को सत्यापित किया क्या जिम्मेदारों को नियम कानून टीम का खौफ नही है।

ठोंका तावा, सेंकी चुनावी रोटी

तत्कालीन निगम आयुक्त को 77 लाख़ के एफडीआर कांड में खदबर्रों मचने पर, ठेकेदार पर 18 लाख का जुर्माना ठोकने का बयान देना पड़ा।
इसके बाद पूर्व मंत्री व नगर विधायक ने ऐन निकाय चुनाव के दौरान एक होटल में प्रेसवार्ता आयोजित कर अपनी पार्टी का स्थानीय घोषणा पत्र जारी किया जिसमें उन्होंने भाजपा की नगर सरकार बनने पर 77 लाख रुपये के एफडीआर अफरा-तफरी कांड और निगम व स्मार्ट सिटी के अनिमितताओं की जांच और कार्रवाई का दावा किया था,
है। चुनाव में भाजपा की जीत हुई 1 साल 7 माह पूर्व गत फरवरी 2025 नई मेयर ने शपथ ली पर हुआ कुछ नही। उल्टे उसी तवे पर फिर 1 करोड़ 40 लाख का मांडवाली अंगाकर पक गया।

आखिर सब चुप क्यो…?

बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड में बिलासपुर को स्नो पावडर लगाने कितने की गफलत हुई है इसका कोई हिसाब किताब ही नही है। सीजीडीएनए 4-6 माह से जानकारी मांग रहा एआज तक नही दिया गया अफसर तक बदल गए, खूब हल्ला मचा सवाल पूछे गए तो केंद्रीय राज्य मंत्री व नगरीय प्रशासन का दायित्व संभालने वाले उपमुख्यमंत्री ने खुद निरीक्षण कर आरोपो की जांच कराने का बयान भी दिया पर एआज तक कुछ नही किया।

इसलिए नही हुआ बिलासपुर का भला

न्यायधानी बिलासपुर के निगम में सालो से जमे अफसरो और पिछलग्गू नेताओं की ठेकेदारी का का ही परिणाम है कि अरबो के सड़क और नाले नालियों के निर्माण के बाद भी शहर का व्यवस्थित विकास नही हो सका, इसके बाद भी बारिश में आधा शहर डूब जा रहा, नाले में लोग बह जा रहे, पुराना बस स्टैंड क्षेत्र से तो जमीन फाड़के आदमी निकलने का अनोखा और चर्चित मामला बी सामने आया।

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दस्तावेज देखकर बता पाऊंगा

CGDNA ने निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे से उनके दफ्तर में भेंट कर जानना चाहा कि पूरा मामला है क्या, फिर कैसे और किसकी रिपोर्ट पर 8-9 साल बाद 1 करोड़ 40 लाख के एफडीआर का भुगतान दे दिया गया, यदि सही था तो इतने दिन क्यो रोककर रखा गया और गलत है तो भुगतान कैसे हो गया…? उन्होंने कहा कि वे दस्तावेज देखकर ही कुछ बता पाएंगे।

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शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
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