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36 दूनी बहत्तर… न दवाई न डॉक्टर…?

0 संभागीय मुख्यालय के जिला अस्पताल और सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर और दवाइयों का टोंटा

0 सीएमएचओ ने कहा, दवाइयों की कोई कमी नही डॉक्टरों की खोज जारी है

बिलासपुर/  36 गढ़ राज्य निर्माण के 26 साल बाद भी प्रदेश में चिकित्सा व्यवस्था का हाल बेहाल है। दावा सूबे के अंतिम छोर, अंतिम व्यक्ति तक चिकित्सा पहुचाने का है, पर हकीकत ये है कि संभागीय मुख्यालय के जिला हॉस्पिटल और शहर के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर है न दवाई जैसा का हाल है, वो भी तब जब चर्चित और फेमस CGMSC को सप्लाई का जिम्मा है, पर न वो दवाई ढील पा रहे न जिम्मेदार कुछ एक्शन ले पा रहे…?

जिला अस्पताल के दर्ज रिकॉर्ड की माने तो अस्पताल के पर डे की ओपीडी 500 से 600 के करीब बताई जा रही, यानि स्थिति विश्वास है, पर डॉक्टर नहीं जैसा है! जिला अस्पताल में 135 प्रकार के जांच की सुविधा से सम्पन्न लैब है, सीटी स्कैन मशीन भी है! पर डॉक्टरों के टोंटे के कारण मरीजो का इलाज ऑपरेशन नही हो रहा। समुचित चिकित्सा व्यवस्था न होने के कारण लोग जेवर गहना, जमीन, मकान बेचकर या मंगलसूत्र गिरवी रखकर निजी अस्पतालों में अपने मरीजो का इलाज कराने किस कदर विवश है और उसके बाद भी हो क्या रहा… दावा है क्या सब देख सुन रहे…

ये है हालात

मेडिसिन विभाग…

संभागीय मुख्यालय के जिला अस्पताल के मेडिसिन विभाग में वर्तमान में कहने के लिए 2 डॉक्टर है! इनमें से 1 स्वास्थ्यगत कारणों से अवकाश पर है, वहीं रिटायर्ड सिविल सर्जन संविदा डॉक्टर अनिल गुप्ता के भरोसे पूरा मेडिसिन विभाग संचालित है!

आर्थोपेडिक विभाग….

जिला अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में तो कोई आर्थोपेडिशियन डॉक्टर ही नहीं है!

एनेस्थिया विभाग…

जिला अस्पताल के एनेस्थिया विभाग का भी यही हाल है! ये विभाग भी डॉक्टर विहीन है!

गायनी विभाग…

जिला अस्पताल के गायनी विभाग में भी डॉक्टरों का टोटा है! वर्तमान में यहां 2 गायनकोलॉजिस्ट डॉक्टर है, और 1 डॉक्टर की कमी बताई जा रही है!

सर्जन है, एनेस्थिटस्ट नही

संतोषजनक बात यह है कि बताया जा रहा… सर्जरी विभाग डॉक्टरों के मामले में भरा पूरा है! पर किस काम का… क्योंकि जब एनेस्थेटिस्ट डॉक्टर ही नहीं है, तो मरीजो का ऑपरेशन होगा कैसे… ये बड़ा सवाल है!

और ये है दवाओं की स्थिति

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लिंगियाडीह शहरी स्वास्थ्य केंद्र

CGDNA की टीम ने लिंगियाडीह शहरी स्वास्थ्य केंद्र का जायजा लिया, तो अस्पताल में मरीजो की अच्छी खासी भीड़ तो दिखी लेकिन दवाइयो का टोटा खुलकर सामने आ गया। दवा वितरण कक्ष में चर्चा करने पर पता चला कि यहाँ टेटनेस टॉकसाइड, सिरिंज, ओआरएस घोल का पैकेट, ग्लब्स ही नही है, वही रैबीज का टीका भेजे गए इंडेंट ऑर्डर से कम आने की बात कही गई।

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राजकिशोर नगर शहरी स्वास्थ्य केंद्र

यहाँ भी ओआरएस घोल, दो बच्चों में गेप के लिए अंतरा इंजेक्शन, गर्भवती महिलाओं को दी जाने वाले कैल्शियम के टेबलेट, सिरिंज और टिटनेस के इंजेक्शन, ग्लब्स का टोटा होना बताया गया।
टीम ने यहाँ ड्यूटीरत प्रभारी डॉक्टर से चर्चा का प्रयास किया परन्तु उन्होंने बाइट देने से मना कर दिया।

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अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को इंडेंट भेजने पर दवाईयां भेजी जाती है, ग्लब्स और सिरिंज आ गए है भेजे जा रहे, रैबीज के वैक्सीन की आवक कम है जहाँ तक ओआरएस की बात है तो वो नही है मंगाया गया है जल्द आने पर अस्पतालों में सप्लाई की जाएगी।

सुनीता सिंह,वेयर हाउस, सीजीएमएससी

डॉ शुभा गरेवाल, CMHO. बिलासपुर

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शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
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