

बिलासपुर/ आखिरकार शहर के 1 मॉल में लगे ब्रांडेड कपड़ो के सेल में ब्रांडेड के नाम पर नकली माल खपाने के आरोप और इसको लेकर में सिविल लाइन थाने में की गई लिखित शिकायत में मांडवाली की खबर है, देर रात थाना परिसर में गहमा- गहमी के बाद पुलिस दोनों पक्ष में समझौते का हवाला दे रही, पर अब सवाल यह उठ रहा कि क्या इससे अब्राण्डेड कपड़े ब्रांडेड हो गए क्या इसके नाम पर धोखाधड़ी के लगाए गए आरोपो पर पोंछा मार दिया गया।


ये शिकायत की गई थी
तेलीपारा निवासी अनिमेश रजक ने शुक्रवार 9 अक्टूबर को सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई कि
हॉटल कोर्टयार्ड मेरियोट मे ब्राण्डेड कपडो का सेल लगा हुआ था जिसमे ब्राण्डेड कपडो पर 80 प्रतिशत तक के छूट का खूब प्रचार-प्रसार किया गया, सोशल मीडिया में रील देखने के बाद वे अपने साथियों के साथ गत 8 अक्टूबर की रात अपने साथियों के साथ सेल में गए और ब्राण्डेड कम्पनियों
लॉकेस्ट्रेक, सीके, जारा, स्पायकर, बेनेटन, नायकी, पेपे जींस एवं जॉकी के टीशर्ट, जीन्स, जैकेट, मोजे की खरीददारी की। उन्हें मेसर्स / अयाज खान इंटरप्राइजेज के नाम से
27,600 रूपये का 3 जीएसटी बिल दिया गया।

अनिमेष ने बताया कि सेल में खरीदे गए कपडो को पहले से घर पर मौजूद ब्रांडेड कपडो एवं ब्राण्डेड कपडा दुकानदारो से मिलान कराया तो कपडो की क्वालिटी को फर्स्ट कॉपी होना पाया गया। आवेदक ने पुलिस को बिग ब्रांड सेल द्वारा दिए गए मेसर्स अयाज़ खान इंटरप्राइजेज के नाम से दी गई बिल के 3 छायाप्रति, कपडो का फोटोग्राफ की प्रति जमा करा कार्रवाई की मांग की थी।

उठ रहे सवाल
0 जब सेल का नाम बिग ब्रांड तो मेसर्स अयाज खान इंटरप्राइजेज का बिल क्यो।
0 जब शिकायत गलत और कपड़े ब्रांडेड है सही है तो फिर आवेदक ने कपड़े वापस कर पैसे वापस क्यो लिए।
0 जिस ब्रांड के कपड़ो पर कॉपी होने के आरोप लगे उनकी जांच के लिए सम्बंधित कम्पनी या कम्पनी के शो रूम से तस्दीक कराने की कार्रवाई क्यो नही की गई।
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इस मामले में दूसरे दिन शनिवार को सीजीडीएनए की टीम ने बिग ब्रांड सेल के मैनेजर से भेंट कर चर्चा का प्रयास किया परन्तु मैनेजर ने कहा दिया कि वे इस मामले में कुछ नही कहेंगे।
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आवेदक की शिकायत पर देर शाम सेल के मैनेजर को थाने लाया गया था। मैनेजर ने कपड़े वापस लेकर पैसे वापस करने सहमति दी दोनो पक्ष ने आपसी समझौता कर लिया इसके बाद आवेदक ने शिकायत वापस ले लिया, ब्रांडेड कपड़े के नाम पर नकली माल बेचकर धोखाधड़ी के आरोप की शिकायत तो है लेकिन असली है या नकली जांचने के लिए पुलिस के पास कोई पैमाना नही इसलिए पुलिस आगे कुछ नही कर सकती जब तक कम्पनी की ओर से कोई हस्तक्षेप,शिकायत या प्रमाण न हो।
किशोर केवट
टीआई सिविल लाइन



