
बिलासपुर। ये संयोग है या प्रयोग राम जाने मामला पोस्टर पच्चीसी का है पूरे शहर ने देखा कि कैसे नेताओं के हंसते मुस्कुराते थोबड़े वाले पोस्टर चिथड़े होते तक लटकते रहते है।

पर ये क्या प्रदेश के कद्दावर नेता के जन्मदिन के बैनर पोस्टर दूसरे दिन ही निकाल दिए गए। शहर में इस को लेकर बड़ी चर्चा है कि आखिर माजरा है क्या।

आप खुद देखिए कैसे निगम का अमला नेताजी के जन्मदिन के दूसरे दिन शहर के विभिन्न इलाकों से उनके पोस्टर निकालते दिख रहे। सारे बैनर पोस्टर निकाल दिए गए। अब सवाल यह उठता कि यदि ये राजनीतिक सुचिता का संदेश देने की पहल है तो फिर वो क्या था जब तारबाहर चौक के शहीदों की नाम पट्टिका के सामने पंडित देवकीनन्दन चौक के तिरंगा झरना के सामने और चौक- चौराहों पर स्थापित महापुरुषों की प्रतिमाओं को बैनर पोस्टर से ढक दिया गया।जबकि वहाँ बैनर पोस्टर न लगाने की तख्ती लिखी है।

सवाल यह भी उठ रहा है कि कही इन बैनर पोस्टरों को उतारकर देने की बेगारी तो निगम अमले पर नही थोप दी गई और ये भी कि क्या अब हर आयोजन के बाद इसी तरह शहर की सुंदरता को बदरंग करने वाले बैनर पोस्टर निकाल लिए जाएंगे।
