बिलासपुर। सच कहते थे इनकी नजर मंगलसूत्र पर है। तभी तो निगम के 8-9 हजार मासिक मानदेय पाने वाले निगम कर्मी को अपनी गर्भवती पत्नी की डिलीवरी कराने किम्स अस्पताल प्रबंधन के दुर्व्यवहार और दबाव के चलते अपनी पत्नी का मंगलसूत्र गिरवी ऱखना पड़ा। वो भी ईएसआईसी आयुष्मान और जननी और जननी सुरक्षा जैसी 3-3 योजनाओं के होते हुए। सिस्टम के लिए इससे शर्मनाक बात क्या हो सकती है।


लोकसभा चुनाव के दौरान मंगलसूत्र का जुमला सच साबित हो रहा। ये हम नही निगम कर्मी और बेबस स्वास्थ्य विभाग कह रहा। कोरोनाकाल से लेकर अब तक कि गणना कर ले तो इस दौरान चर्चित किम्स से ऐसे दर्जनों मामले सामने आए। इसके अलावा शिशु भवन केयर एंड क्योर से भी इसी तरह के मामले आते रहे पर आज तक किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नही की गई।

इससे जाहिर है कि या तो इन अस्पताल संचालको के राजनीतिक रसूख के कारण इन पर कोई कार्रवाई नही की गई गया फिर सबका हिस्सा पहुच रहा इसके अलावा और क्या वजह हो सकती है।

अब सवाल यह उठ रहा कि कमजोर स्वास्थ्य विभाग क्या इन मामलों पर कोई कार्रवाई करेगा या फिर कोरोनकाल के दौरान इन चर्चित अस्पतालों से आये 100 से ज्यादा मामलों की तरह इस मामले की शिकायत जांच टीम तक ही सीमित रह जायेगी। क्योकि मामला मंगलसूत्र का है।

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