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रुपया भोंजन और दवाई, ये कैसी जनसुनवाई… इनकी क्यो नही सुनी गई


0 क्या होगा किसानों के फसलों और जनस्वास्थ्य का

0 क्या स्थानीय युवाओ को मिल पायेगा रोजगार

  गुर्गों के एक लेयर के बाद पुलिस की घेराबंदी

बिलासपुर। घुटकू में हुई जनसुनवाई की सामने आई तस्वीरों ने जनसुनवाई के नाम पर किये गए ढकोसले को उजागर कर दिया। प्लांट संचालक के गुर्गों ने प्लांट में काम करने वालो को लाइन लगवाकर समर्थन का रट्टा लगवा दिया। विरोध करने वालो को भी सेट कर लिया गया वे पहुँचे ही नही। जो पहुँचे उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया पर सच्चाई तो सच्चाई है सामने आ ही गई। प्लांट संचालक उनके गुर्गे और पुलिस व प्रशासन के अफसर चाहे एक दूसरे से हाथ मिलाकर जितनी बधाई दे दे पार्टी कर ले कि वे कामयाब हो गए पर इस हकीकत को कौन नकार सकता है।

सीजीडीएनए ने अपने खबर के जरिये यह दिखाने और बताने की कोशिश की कि इस जनसुनवाई को कैसे पैसे, भोंजन पैकेट और दवाइयों के जरिये निबटाया गया।

जनसुनवाई उत्सव, समर्थन के एवज में रकम बांटते गुर्गे

कैसे युवाओ को दारू मुर्गे की पार्टी में उलझाकर उनके गांव को उजाड़ करने की कोशिश की गई उनके हाथ क्या लगा। गाँव के इतने बड़े फैसले के दौरान चुनावो में घुमघुमकर वोट की भीख मांगने वाले जनप्रतिनिधि और उचकने वाले विरोधी तक शांत पड़ गए।

ऐसे लगवाया गया समर्थन का रट्टा

कैसे विरोध करने पंडाल तक पहुँचे बुजुर्गों पंडाल के अंदर नही जाने दिया गया। इन बुजुर्गों ने पंडाल के बाहर ऐलान कर दिया कि सब बिक गए पैसे म खेल चल गया।

  ग्रामीणों को ऐसे बांटे गए भोंजन पैकेट

इन बुजुर्गों ने शासन-प्रशासन को भी कटघरे में खड़े कर दिया। सवाल यह उठ रहा कि अब प्रशासन के पास इसका क्या जवाब है उनकी क्यो नही सुनी गई।

सब बिक गए, उखाड़ फेंकना चाहिए

पीताम्बर प्रसाद सिंगरौल पूर्व सरपंच घुटकू

ऊपर से नीचे तक सब सेट

कृष्ण कुमार सिंह चौहान, ग्राम घुटकू

कम्पनी के लठैतों के कारण इनकी आवाज प्रशासन के कानों तक नही पहुँच सकी। सीजीडीएनए इनकी आवाज उन जिम्मेदारों तक पहुँचा रही सवाल यह उठ रहा कि सुशासन के ये तंत्र क्या अब इनकी आवाज सुन कोई ठोस पहल करेंगे या गठरी बंधा गया है।

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शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
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