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क्षेत्रीय पर्यावरण मंडल दफ्तर बोले तो बोक बाय, वेलकम डिसलरी और राजश्री पान मसाला के खिलाफ क्या कार्रवाई पूछने पर बता रहे राजधानी के जनसम्पर्क कार्यालय का नम्बर 

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0 मिलने का दिन और समय का पम्पलेट चिपका बजा रहे चैन की बंसी

0 कोई जिम्मेदार अफसर जवाब देने की स्थिति में नही

बिलासपुर। छत्तीसगढ पर्यावरण संरक्षण मंडल के व्यापार विहार का क्षेत्रीय कार्यालय आवक जावक शाखा बनकर रह गया है। आलम काम कौड़ी का नही और फुर्सत क्षण भर का नही जैसा है। मिलने का समय और दिन सब दीवारों पर लिखकर चिपका दिया गया है, पर जिम्मेदारों को न तो वेलकम डिस्लरी शराब प्लांट से निकलने वाले जहरीले गैस और प्रदूषण के सम्बंध में कोई जानकारी है न ही सिरगिट्टी के राजश्री फैक्ट्री से निकलने वाले गर्द और बदबूदार गैस से हलाकान रहवासियों की कोई खबर है। ऐडा बनकर पेड़ा खाने वाले अफसर कुछ भी पूछने पर रायपुर के जनसम्पर्क कार्यालय का नम्बर टिका हम बोलने के लिए अधिकृत नही है कहकर पल्ला झाड़ ले रहे है।


पर्यावरण के नाम पर सिर्फ और सिर्फ चोंचलेबाजी चल रही है, इस कार्यालय में शिकायत और जानकारी लेने के लिए पहुचने वाले आमजन को पहले तो अफसर से मिलाने टाइम लगेगा कहकर इंतेजार कराया जाता है, फिर क्षेत्रीय पर्यावरण अफसर के बाहर दौरे पर होने का हवाला देकर कार्यालय के एक्जक्यूटिव इंजीनियर आलोक कुमार साहू  से मिला दिया जाता है, जो ऐसी कोई शिकायत नही मिली है और जानकारी नही है जैसे रटा रटाया जवाब देकर विभागीय जनसम्पर्क कार्यालय का नम्बर टिका कुछ भी बोलने से पल्ला झाड़ लेते है।


वेलकम डिसलरी का मामला विधानसभा तक पहुच गया, एनटीपीसी प्रभावित करीब दर्जन भर गावो के लोग राखड़ फांकने विवश है। सिरगिट्टी के राजश्री पान मसाला फैक्ट्री से गर्द और खतरनाक कैमिकल के कारण वहां के रहवासियों के दम घुटने और बीमार पड़ने की खबरे आ रही। देश का भविष्य कहलाने वाले नौनिहालों के जीवन पर संकट के बादल मंडरा रहे और पर्यावरण विभाग के जिम्मेदार है कि जबाब देने की स्थिति में नही है विभगीय अमले के इस गैरजिम्मेदाराना हरकत पर यदि समय रहते लगाम नही लगाया गया तो दिल्ली एनसीआर की तरह यहां भी साँसो का संकट खड़ा हो सकता है।


शासन प्रशासन को चाहिए कि क्षेत्रीय कार्यालय में तेजतर्रार और जवाबदेह अफसरों की तैनाती की जाए ताकि तमाम बंदिशों को दरकिनार कर अपने उधोगो की चिमनियों से जहरीला धुँआ और गैस उड़ाकर साँसों का संकट पैदा करने वाले उधोगपतियों पर लगाम लगाया जा सके।

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