0 नियमों की अनदेखी: सरकारी आवास के पास नवनिर्मित जी-3 कॉम्प्लेक्स पर उठे सवाल
0 अधिकारी बोले-कोई गड़बड़ी नहीं सब ओके, लेकिन सबूत मांगने पर चुप्पी साधी!
0 क्या पारदर्शिता का ढोल पीटने वाले खुद ही हैं नियमों के दायरे से बाहर?
नगर पालिक निगम बिलासपुर में नियमों की अनदेखी: क्या अधिकारी भी हैं नियमों के दायरे में?


बिलासपुर। क्या नियमों का पालन कराने वाले अधिकारी स्वयं उन नियमों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं हैं? नगर पालिक निगम बिलासपुर के आयुक्त के सरकारी आवास के निकट स्थित नवनिर्मित जी-3 कॉम्प्लेक्स को हाल ही में एक बैंक को किराए पर दिया गया है। गौरवपथ रिंगरोड-2 उसलापुर बायपास पर इस कॉम्प्लेक्स का निर्माण नगर पालिक निगम बिलासपुर के भवन शाखा अधिकारी के भाई द्वारा किया गया है। यह मामला अब चर्चा का विषय बन गया है।

भवन निर्माताओं को सही तरीके से निर्माण न करने पर नसीहत देने वाले भवन शाखा अधिकारी को इस निर्माण में कोई गड़बड़ी नजर नहीं आई। CGDNA की टीम ने जब भवन शाखा अधिकारी सुरेश शर्मा से इस संदर्भ में सवाल किया तो उनका जवाब था कि इस जी-3 कॉम्प्लेक्स के निर्माण में कोई फॉल्ट नहीं है और सब ओके है। यह स्थिति तब है जब निर्माण की जगह के अनुसार नसीहतें दी जाती हैं कि अगल-बगल जगह छोड़कर निर्माण किया जाए।
इस मामले में रिटायर्ड इंजीनियर गोपाल ठाकुर ने बताया कि व्यवसायिक भवनों के निर्माण के लिए प्लॉट एरिया के हिसाब से 50 से 60 प्रतिशत जगह छोड़ने का प्रावधान है

। यदि भवन के दोनों तरफ सड़क है और बगल के हिस्से में कोई शटर या शीशा लगाया गया है, तो साइड रोड की तरफ से भी कम से कम 15 प्रतिशत जगह छोड़ी जानी चाहिए। इससे स्पष्ट होता है कि नियमों का पालन न होने पर क्या-क्या परिणाम हो सकते हैं।
CGDNA की टीम ने सम्पदा अधिकारी सचिन गुप्ता और भवन शाखा अधिकारी से संबंधित प्रमाणित दस्तावेज की मांग की, लेकिन दोनों ने दस्तावेज देने से मना कर दिया। इस मामले में कोई भी अधिकारी जानकारी देने को तैयार नहीं है, जिससे उनकी पारदर्शिता पर सवाल उठता है।

इस विवादास्पद निर्माण को लेकर सुरेश शर्मा का कहना है कि यह भवन पूरी तरह से नियमों के अनुसार बनाया गया है और इसका नियमितीकरण भी हो चुका है। लेकिन, सवाल यह है कि क्या यह नियमितीकरण वास्तव में पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से किया गया है या केवल नियमों की अनदेखी के आधार पर?
इस पूरे मामले से यह साफ होता है कि जब नियमों को लागू करने वाले ही उनके पालन में खौल उल्लघंन कर रहे हैं, तो आम नागरिकों के लिए क्या उम्मीद बचती है? नगर पालिक निगम को इस मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी नागरिकों के लिए समानता बनी रहे। यदि प्रशासनिक स्तर पर इस प्रकार की अनियमितताएँ होती रहीं, तो यह न केवल नियमों का अपमान है, बल्कि नागरिकों के प्रति विश्वास को भी तोड़ने का कार्य है।
और कैसे हुआ नियमितीकरण जानने के लिए हमारे साथ बने रहिए CGDNA.IN
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