
बिलासपुर,,, इन दिनों शहर के थाने में ‘सुपर मेनेजमेंट आरक्षकों’ की बढ़ती भूमिका और उनकी मनमानी कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं! पुलिस के आला अधिकारी और थाने के प्रभारी तक इस दबदबे के आगे नतमस्तक हो गए हैं! जिससे पीड़ितों को न्याय मिलने में भारी दिक्कतें हो रही हैं! पीड़ित को न्याय के लिए उच्च अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं! जबकि मेनेजमेंट आरक्षक के प्रभाव से कई मामलों में कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली जाती है! सूत्रों के अनुसार, कई मामलों में मोटी रकम के लेन-देन की भी चर्चा है! जिससे यह संदेह पैदा होता है! कि इन मामलों में कुछ बड़े खेल हो रहे हैं!
इस बार मामला सिविल लाइन थाने से जुड़ा हुआ है! जहां एक लूट के मामले में कार्रवाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं! 30 मार्च, 2025 को मंगला चौक में हर्ष चौरसिया और उनके मित्र तरुण शर्मा से महेन्द्रा थार (क्र. CG 10 Ax 0030) लूट लिया गया! गोल्डी मेश्राम नामक बदमाश ने कार की चाबी छीन ली, मारपीट की और गाड़ी लूट कर फरार हो गया! पीड़ित ने तुरंत थाना पहुंचकर एफआईआर दर्ज करने के लिए आवेदन दिया, लेकिन दो-तीन दिन तक उसे चक्कर काटने पड़े और कोई कार्रवाई नहीं हुई!
सिविल लाइन सीएसपी निमितेश सिंह को जानकारी मिलने के बाद ही आदेश जारी हुए, और गोल्डी मेश्राम को लूट की गाड़ी के साथ थाने लाया गया! लेकिन थाने में दिनभर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ दबाव बनाकर पीड़ित से गाड़ी वापस कर दी गई और आदतन अपराधी गोल्डी मेश्राम पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करके उसे अभयदान दे दिया गया! इस पूरी स्थिति से यह साफ हो गया कि पुलिस विभाग में ‘सुपर मेनेजमेंट आरक्षकों’ का प्रभाव बढ़ता जा रहा है! और इस कारण आम जनता के लिए न्याय पाना कठिन हो गया है!

गोल्डी मेश्राम पहले भी कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखा चुका है! 2022 में उसने मगरपारा चौक में एक युवक को क्रिकेट बैट से बेरहमी से पीटा था! जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था! इसके बाद भी कई मामलों में नामजद होने के बावजूद पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई! इस आदतन अपराधी के खिलाफ कई थानों में गंभीर धाराओं में मामले दर्ज हैं!
इसी तरह, सिविल लाइन पुलिस ने गोल्डी मेश्राम के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की और उसे सिटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया, जहां से उसे तुरंत जमानत मिल गई! इससे यह साफ होता है! कि पुलिस प्रशासन ने मामले को दबाने और आरोपी को बचाने के लिए एक बड़े मेनेजमेंट की भूमिका निभाई है!
पूर्व विधायक शैलेश पांडेय ने कुछ समय पहले पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ‘रेट लिस्ट’ और ‘मूल्य निर्धारण’ जैसे बयान दिए थे! जो आज भी प्रदेश की सरकार में कुछ हद तक लागू होते नजर आ रहे हैं! अब यह देखने वाली बात होगी कि जिले के कप्तान इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं! और पुलिस की छवि को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान कैसे होता है!
बिलासपुर में इस मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है! कि क्या पुलिस प्रशासन में भ्रष्टाचार और सांठगांठ की समस्या इतनी गहरी हो गई है!कि अपराधी बिना किसी डर के कानून को चुनौती दे रहे हैं!
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