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अपनी बदहाली पर आँसू बहा रहा करोड़ो का ट्रैफिक एजुकेशन पार्क, नायाब कोशिश हो गई उजाड़,

0 नई पीढ़ी को खेल-खेल में सड़क पर चलने के तौर तरीके सिखाने कराया था निर्माण
0 पहल शानदार फिर अच्छे मन से करनी होगी प्लानिंग के साथ नई शुरुआत

बिलासपुर खेल-खेल नई पीढ़ी को यातायात व्यवस्था की शिक्षा देने 15 साल पूर्व करोड़ो की लागत से सीपत रोड के ग्राम लगरा में तामझाम के साथ लोकार्पित की गई जिला पुलिस बल की एक नायब कोशिश ट्रफिक एजुकेशन पार्क रखरखाव के अभाव में खंडहर में तब्दील हो गई। इन तस्वीरों में आप खुद देखिये कैसे करोड़ो की लागत से निर्मित ट्रफिक पार्क वीरान और उजाड़ पड़ा है।

इस ट्रफिक पार्क को विकसित करने का उद्देश्य भावी पीढ़ी को सड़क पर चलने और नियम कायदों का पालन करने की शिक्षा देना था। तत्कालीन भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह से तामझाम के साथ गत 25अप्रैल 2010 को इस ट्रैफिक एजुकेशन पार्क का लोकार्पण कराया गया था। शुरुआत के कुछ महीनों में यहां स्कूली बच्चों को ट्रफिक नितम सीखाने के लिए लाने का सिलसिला चला फिर जब वीरानी छाई इस परिसर को बंद कर दिया गया, तब से यह परिसर ताला बन्द और उजाड़ पड़ा है।

किसी का सिर तो किसी का धड़ गायब, बाकी सब ध्वस्त

बच्चों को यातायात नियमो की शिक्षा देने के लिए बनवाई गई डामर की सड़क पर लंबी- लंबी दरारें उभर आई है। पुटपाथ भी जगह- जगह से उधड़ धंस गई है। बच्चों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र ट्वाय ट्रेन डिरेल और जंग खाते पड़ी है। पूरे परिसर में कटीली झाड़ियां उग आई है। औडिटोरिम समेत अन्य भवनों के खिड़की दरवाजे, स्टेनलेस स्टील के रेलिंग पाइप सब असमाजिक तत्व उखाड़कर ले गए। बिलासपुर स्टेशन का मॉडल भवन जर्जर हो रहा। बच्चो के लिए बनवाये गए बालवाड़ी के झूले गायब और टूटे पड़े है। ट्रफिक सिग्नल के मॉडल टूटे फूटे पड़े है तो ज्यादातर गायब पड़े है।

किसी के दोनों हाथ तो किसी के सिर गायब

सड़क के मॉडल के चौक- चौराहो में ड्यूटी पर तैनात ट्रफिक जवानों के पुतले क्षत- विक्षत पड़े है। किसी के दोनों हाथ नही तो किसी के पैर वही कईं में तो सिर और धड़ अलग पडे है।

मवेशियों का डेरा

सड़क तो सड़क ट्रैफिक एजुकेशन पार्क की सड़कों और मैदानों तक मे मवेशियों के डेरा है। कोई देखने वाला नही।

इसका उन्नयन कर उचित संचालन किया जाए

ट्रैफिक एजुकेशन पार्क निश्चित तौर पर जिला पुलिस बल बिलासपुर की एक अभिनव फल थी। पुलिस विभाग को इसे पुनर्जीवित कर नॉमिनल शुल्क पर इसे संचालित करने और स्कूलों के बच्चों को यहाँ अनिवार्य रूप से यातायात की शिक्षा दिलाने के लिए लाए जाने का नियम बनाया जाना चाहिए, ताकि ये ट्रफिक एजुकेशन पार्क फिर से आबाद हो सके, नई पीढ़ी को खेल-खेल में बच्चों को यातायात की शिक्षा देने पहल करनी चाहिए , ताकि नई पीढ़ी जान ले कि सड़क पर कैसे सुरक्षित चलकर अपने आपको और दूसरों सुरक्षित सड़क पर चलने का मौका मिल सके।

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शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
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