0 पुलिस पर लग रहे बिगाड़ के डर से स्टोरी बनाने के आरोप

0 जिले का खनिज महकमा बमबम,


बिलासपुर । कोटा थाना क्षेत्र के लमेर रेत घाट में हुए गोली कांड में एक भाजपा विधायक के करीबी का नाम आ रहा है । जिसकी वहां तूती बोल रहीं है।
बताया जा रहा कि गोली मारने वाला और घायल दोनों उसी के लिए काम करते है, पुलिस ने एक्सीडेंटल स्टोरी तो बता दिया पर उससे भी गम्भीर सवाल ये है कि शांति का टापू कहलाने वाले छत्तीसगढ़ के न्यायधानी में घातक हथियार है कितने। रेत में इफरात पैसा है यही वजह है कि जिस पार्टी की सत्ता आती है उस पार्टी के नेता के करीबी यही हाथ मारतें है।

दोनो दल की सरकारें अरपा को चकाचक और बारहोंमासी जल भराव का सब्जबाग दिखाते है, बिलासपुर है अफसर भी वैसे ही आ रहे पानी की तरह योजना के नाम पर करोड़ो बहा दे रहे, सब फेल पड़ी है। ज्यो ज्यो पांव पड़े सन्तन के जैसा हाल है, अरपा दिनोदिन बदहाल होते जा रही। सरकार भाजपा की आई तो कांग्रेस के बाद अब घाटों में भाजपा नेताओं की बल्ले- बल्ले हो गई। बताया जा रहा कि एक भाजपा विधायक के करीबी का जलवा है, घाटों मे उनके गुर्गे लगे है। हथियारों से लैश गुर्गे 24 घण्टे यहां ट्रेक्टर, हाइवा से वसूली कर रहे।

स्टोरी आफ द पुलिस
इधर पुलिस कहानी बता रही कि घटना गत 5 मई को लगभग शाम 6-7 बजे की है। ग्राम लमेर में गोली चलने की सूचना मिली थी। गोली लमेर निवासी गिरजाशंकर यादव उर्फ दीपक यादव पिता मनीराम यादव के पैर में गोली लगी है। घायल पूछताछ में बताया कि वह अपने दोस्त दीपक रजक के साथ गाँव में ही घूम रहा था। दीनू भोई के दुकान उनकी मुलाकात छबि यादव से हुई। बातचीत के दौरान छबि ने अपने दोस्तों को पिस्तौल दिखाई, गिरजाशंकर और दीपक को लगा कि पिस्तौल नकली है।
इसी दौरान छबि के हाथ से दुर्घटनावश पिस्तौल का ट्रिगर दब गया और गोली गिरजाशंकर के बाएं पैर पर लग गई। जी
पुलिस छबि से पिस्टल बरामद करना बता रही है। सवाल यह उठ रहा कि जब कोई रंजिश नही बैर नही तो शोषल मीडिया के जमाने मे इस खबर को मीडिया तक पहुँचने में डेढ़ दिन कैसे लग गए। आखिर क्यों पुलिस ने इस मामले को डेढ़ दिन तक दबाने का प्रयास नही किया, क्यो उस निजी अस्पताल में पुलिस का पहरा लगा मीडिया को पीड़ित और उसके परिवार के पास जाने रोका गया ऐसे कई सवाल है, जो गोली कांड के स्टोरी को सन्देह के दायरे में खड़ा कर रही है, न्यायधानी के लिए ये घटना बेहद शर्मनाक है इस पर पर्दा डालने के बजाय यदि समय रहते ठोस कदम नही उठाये गए तो परिणाम भयावह हो सकता है।
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