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खम्भा बेन अंधेरे में, करोड़ो की स्ट्रीट लाइटे ठप्प, वाहनों की लाइटों के भरोसे सड़को पर दौड़ रही ट्रैफिक

0 ईईएसएल ने समेटा काम, ठेका श्रमिको समेत 55 का स्टाफ
0 रेलवे और सकरी  क्षेत्रवार्डो को छोड़ पूरे शहर की विद्युत व्यवस्था इनके कंधों पर

दयालबंद- लिंगियाडीह पुल पर छाया अंधेरा

बिलासपुर । करोड़ो की स्ट्रीट लाइटों होने के बावजूद रखरखाव की समुचित व्यवस्था न होने के कारण शहर के लगभग आधे हिस्से की लाइटे ठप पड़ी है। सड़को पर अंधेरा छाया है और ट्रैफिक वाहनों के हेड लाइटों के भरोसे दौड़ रही है।

दयालबंद- लिंगियाडीह पुल पर गाड़ियों के हेडलॉइट की रौशनी पर आवागमन

राजस्व विभाग कर बाद बिजलीं विभाग का काम ईईएसएल से वापस लेने के बाद निगम प्रशासन ने विधुत व्यवस्था के संचालन और संधारण का काम 3 रेगुलर कर्मचारी, 8-10 डेलीवेजेस और 30 ठेका श्रमिको समेत लगभग 55 के स्टाफ के भरोसे खुद अपने हाथ में ले लिया, पर व्यवस्था नही बदली कही 24 घण्टे स्ट्रीट लाइटे जल रही

लिंगियाडीह वेयर हाउस रॉड पर धुनी की तरह 24 घण्टे जलती है लाइट, मवेशियों के डेरा भी

तो कही अंधेर अंधेरा छाया है। आप खुद देखिये ये तस्वीरें दयालबंद- लिंगियाडिह पुल का है, कैसे अंधेरा छाया है और गाड़िया कैसे वाहनों के हेडलॉइट के भरोसे सड़क पर दौड़ रही है।

ये है जिम्मा-

ठेका श्रमिको 3 रेगुयलर और 8-10 डेलीवेजेस स्टाफ समेत इन 55 कर्मचारियों के जिम्मे रेलवे और सकरी क्षेत्र के वार्डो को छोड़ पूरे शहर की विद्युत व्यवस्था के मेंट्सनेन्स की जिम्मेदारी है। इसके लिए बाकायदा 7-7, 8-8 वार्ड के लिए 1-1 प्रभारी और उनके अंडर में स्टाफ दिया गया है ताकि शहर की बिजलीं व्यवस्था दुरुस्त हो सके पर हकीकत यही है कि सड़कों पर अंधेरा पसरा है।

तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो तुम्ही हो नेता ठेकेदार भी तुम्ही हो से नही चलेगा काम

जुझारू कर्मठ और जनसेवा का दावा करने वाले निगम में ठेके का ऐसा ही खेल चल रहा। खुद पार्षद बन गए… भाई भतीजे ठेकेदार जबकि निगम एक्ट में स्प्ष्ट प्रावधान है कि जनप्रतिधि या उनके परिवार के सदस्य निगम के ठेका पद्धति में भाग नही ले सकते इसके बावजूद ठेके का खेल जारी है, निगम के कुछ इंजीनियरो पर भी अपने लग्गु भग्गुओ के नाम ठेका लेने का आरोप है।

ऐसे हो रहा खेल

कर्मचारी वही है चुनाव के बाद जिनकी सत्ता आई ये उनके ठेके में शामिल हो जाते है। 40-50 का स्टाफ रखना बताते है पर उनके पास गिन के 10 कर्मचारी नही होते जो है उन्हें भी साहबो और नेताओं के यहां काम पर लगा दिया जाता है, और तो और रिटायर्ड अफसरों के यहां भी ठेके के कर्मचारी काम कर रहे उन्हें पेमेंट निगम से ठेकेदार के माध्यम से हो रहा है। ऐसे में जनता का काम कैसे होगा ये बड़ा सबाल है।

ये है झोल

0 नेताओ अफसरों और रेग्युलर कर्मचारियों को छोड़ दे तोश हर की सफाई निर्माण समेत सब कुछ ठेके पर चल रहा फिर हर माह निगम के आदर्श पेट्रोल पंप से निगम की गाड़ी में तेल डीजल की 70-80 लाख रुपये के डीजल पेट्रोल की खपत क्यो।

0 जब सब ठेके पर है तो नाले- नालियों का मलबा उठाने का काम निगम के अमले और संसाधन से क्यो कराया जाता है।

0 ठेकेदार जितने श्रमिक देने का दावा करते है उतने है कि नही उनकी हेडकाउंटिंग क्यो नही की जाती।जाहिर है कि सब कुछ मिलीभगत से चल रहा।

इतने ताकतवर है ठेकेदार

नेताओ के पिछलग्गू और निगम के जनप्रतिनिधियों के भाई – भतीज ठेकेदार के पॉवर का ये हाल है श्रमिको को एडवांस देने के नाम पर जब 93 करोड़ का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया और तत्कालीन उपायुक्त ने जब कागजी कार्रवाई कर उन्हें कसना शुरू किया तो ठेकेदारो ने उनका तबादला ही कर दिया।

ऐसे ठेकेदारी से नही होगा जनता का भला

0 ठेके पर श्रमिक लेने के बजाय ठेकेदारो को ही काम का दायित्व सौपना चाहिए,

0 नेताओ के रिश्तेदारों के बजाय हर वार्ड में शिक्षित बेरोजगारों की टीम बनाकर उन्हें काम दिया जाए।

0इससे ने सिर्फ बेरोजगारो को रोजगार मिलेगा बल्कि उन पर दबाव बनाकर काम भी कराया जा सकेगा।

0 ऐसे ठेकेदारी से निगम प्रशासन को होने वाली आर्थिक क्षति पर न सिर्फ प्रभावी रोक लग सकेगी, बल्कि काम भी दिखेगा।

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शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
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