
बिलासपुर । शिक्षको के युक्तियुक्तकरण को लेकर प्रदेश भर में मचे बवाल के कारण मुख्यमंत्री से लेकर जिला प्रशासन को भी डेमेज कंट्रोल की कमान थामनी पड़ रही है। लेंडिंबर रेवड़ियों की तरह अपने लोगो को उपकृत कर मनचाहा जगह भेजने आरोप लग रहे है। बिलासपुर में कलेक्टर संजय अग्रवाल ने मंथन सभागृह में प्रेस वार्ता आयोजित कर मीडिया के समक्ष अपनी बात रखी और यथासम्भव पत्रकारों के सवालों का जवाब भी दिया।


उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति और शिक्षा के अधिकार के मापदंड के अनुरूप राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने स्कूलों में शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया है।
उन्होंने इसको लेकर शिक्षको की नाराजगी और शिकायतो तथा पेचीदगियों पर राज्य शासन से दिशा निर्देश लेकर उचित कदम उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि शहरी इलाकों में जहां शिक्षको की भरमार रही वही ग्रामीण इलाकों मे शिक्षको का टोटा था, जिससे शैक्षिक गतिविधियां और विद्यार्थियों
का परीक्षा परिणाम भी प्रभावित हो रहा था, इसी कमी को दूर करने प्रदेश सरकार द्वारा युक्तियुक्तकरण का कदम उठाया गया है। इससे शिक्षक विहीन और एकल शिक्षकीय स्कूलों में शिक्षा की व्यवस्था कर शिक्षा का माहौल बनाया जा सके। इससे शहर से लेकर गावो तक विषयवार शिक्षको की उपलब्धता सुनिश्चित कराने प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इससेप्रदेश में प्राथमिक स्तर पर छात्र-शिक्षक अनुपात 21.84 बच्चे प्रति शिक्षक एवं पूर्व माध्यमिक शालाओं में 26.2 बच्चे प्रति शिक्षक हैं, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर है।


उन्होंने बताया कि राज्य में 212 प्राथमिक शालाएं शिक्षक विहीन एवं 6,872 शालाएं एकल शिक्षकीय हैं। जिस्मेबसे बिलासपुर जिले के 4 प्राथमिक स्कूल शिक्षकविहीन और 126 स्कूल एकल शिक्षकीय हैं।
वही राज्य में 48 मिडिल स्कूल शिक्षकविहीन और 255 स्कूल एकल शिक्षकी थे। जिले में कोई भी मिडिल स्कूल शिक्षकविहीन नही थे जबकि 4 मिडिल स्कूल एकल शिक्षकीय थे।
राज्य के प्राथमिक स्कूलों में 7,296 शिक्षक और मिडिल स्कूलों में 5,536 शिक्षकों की आवश्यकता है। हमारे जिले में प्राथमिक स्कूलों में 1608 सहायक शिक्षक और मिडिल स्कूलों में 230 शिक्षकों की आवश्यकता है।
वही राज्य के प्राथमिक स्कूलों में 3,608 और मिडिल स्कूलों में 1,762 शिक्षक अतिशेष हैं। जबकि जिले के 457 प्राथमिक स्कूलों और मिडिल स्कूलों में 211 शिक्षक अतिशेष थे। जिनका काउसिंलिग कर कम शिक्षक एवं अधिक दर्ज संख्या वाले शालाओं में समायोजन किया गया है। युक्तियुक्तकरण कोई कटौती नहीं, बल्कि गुणवत्ता और समानता की दिशा में बड़ा कदम है। युक्तियुक्तकरण से लगभग 90 प्रतिशत बच्चों को तीन बार प्रवेश प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी और बच्चों को पढ़ाई में गुणवत्ता के साथ ही निरंतरता भी बनी रहेगी। बच्चों के ड्रॉपआउट दर में कमी आएगी। अच्छी बिल्डिंग, लैब, लाईब्रेरी जैसी सुविधाएं एक ही जगह देना आसान होगा। उन्होंने प्रदेशनके अन्य जिलों के हालात को भी मीडिया के सामने रखा।
यदि किसी शिक्षक के असन्तुष्ट होकर न्यायालय जाने की दशा में क्या व्यवस्था है पूछने पर कलेक्टर ने कहा शासन स्तर पर इसके लिए भी व्यवस्था बनाई गई है, जिला स्तर पर भी ऐसी स्थिति में तैयारी रखने निर्देश डिये गए है।
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