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ये कैसा तिहार, सुशासन के बाद भी जनदर्शन में समस्याओं का अंबार, किसी ने कहा सब दिखावा, तो किसी ने नेताओ और अफसरों को कोसा

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बिलासपुर। शासन के सुशासन तिहार के बाद भी जनदर्शन में ग्रामीण छोटी- छोटी समस्याओं को लेकर पहुँच रहे, जिससे सुशासनी तिहार की जमीनी हकीकत खुलकर सामने आ गई है। सवाल यह उठ रहा कि जब प्रशासन समस्याओं के समाधान का दावा कर रहा तो बिजली- पानी, आवास, जमीन, पट्टा, सीमांकन जैसी मूलभूत कार्यो के लिए आवेदन लेकर गरीब, मजदूर, निःशक्तजनो को कलेक्ट्रेट तक आकर क्यो कलेक्टर के समक्ष लगातार गुहार लगानी पड़ रही है।

इससे जाहिर है कि सुशासन तिहार के ढिंढोरे में दम नहीं है।
जनदर्शन में पहुंचने वाले लोगों का आरोप है कि यहां केवल दिखावा होता है, उनकी शिकायतें वर्षों से लंबित हैं, लेकिन प्रशासन से लेकर नेताओं तक कोई भी ठोस पहल नहीं कर रहै।

पीड़ितों का कहना है कि अगर वे सक्षम होते, तो खुद अपनी समस्याओं का समाधान कर लेते। लेकिन वे मजबूर हैं और जब शासन-प्रशासन ही समाधान नहीं कर पा रहा, तो उम्मीद किससे करें? कुछ लोगों ने यहां तक आरोप लगाए हैं कि कई बार पटवारी, तहसीलदार, सरपंच, यहां तक कि विपक्षी नेताओं द्वारा भी पैसे की मांग की जाती है।

लोगों का कहना है कि नेतागिरी करने वाले नेताओ के लग्गु भग्गू सिर्फ फोटो खिंचवाने में व्यस्त रहते हैं, गरीब अपनी फरियाद लिए प्रशासनिक गलियारों में धक्के खाने विवश है। क्या यही सुशासन तिहार है।

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