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पश्चिम बंगाल पुलिस की दखल से खुली डायरेक्ट डील की पोल, शिकायत पर अम्बिकापुर SP ने थानेदार और आरक्षक समेत 3 को किया सस्पेंड….

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00 मामला नो FIR नो कंप्लेंट सीधे 4 लाख की डील का

00 अम्बिकापुर से आसंनशोल गए थे, आरोपी को उठाने

अंबिकापुर,,,, कुसमी थानेदार ने धोखाधड़ी की शिकायत पर FIR करने के बजाए सौदेबाजी करने में जुट गया! फाइनल डील करने के लिए गुपचुप तरीके से दो आरक्षकों को पश्चिम बंगाल भेज दिया! और वहां से व्यापारी को उठा लिया! इसके बाद मचे बवाल के बाद SP ने थानेदार समेत दोनों आरक्षकों को निलंबित कर दिया है!!!
मिली जानकारी के अनुसार कुसमी थाना क्षेत्र के एक स्थानीय व्यापारी ने कुछ दिन पहले पश्चिम बंगाल के आसनसोल निवासी एक कारोबारी के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत की थी! आरोप है! कि थाना प्रभारी ललित यादव ने न तो शिकायत पर FIR दर्ज की और न ही कार्रवाई करने के लिए कोई कदम उठाया! इसके उलट उन्होंने व्यापारी से समझौता कराने के बदले कथित तौर पर 4 लाख रुपये में डील कर ली! बताया जा रहा है! कि इस डील के तहत टीआई ने थाने के दो प्रधान आरक्षक विष्णुकांत मिश्रा और प्रांजुल कश्यप को गुपचुप तरीके से बंगाल भेज दिया! यही नहीं थानेदार के कहने पर आरक्षकों ने व्यापारी को उसके घर से उठा लिया! मामला तब उलझ गया जब आसनसोल में आरोपी व्यापारी के परिजन इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दे दी। मौके पर पहुंची आसनसोल पुलिस ने जब पूछताछ की तो छत्तीसगढ़ से गए दोनों आरक्षकों के होश उड़ गए। क्योंकि व्यापारी को गिरफ्तार करने के संबंध में उनके पास कोई दस्तावेज नहीं थे। ऊपर से दोनों वहां की पुलिस को अलग अलग बयान देने लगे। संदेह गहराने पर आसनसोल पुलिस ने सीधे बलरामपुर के एसपी से बात की तो सौदेबाजी की खेल सामने आ गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए बलरामपुर-रामानुजगंज के एसपी ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए तत्काल कार्रवाई की। उन्होंने कुसमी थाना प्रभारी ललित यादव, प्रधान आरक्षक विष्णुकांत मिश्रा और प्रधान आरक्षक प्रांजुल कश्यप को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद जिले भर के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। क्योंकि प्रदेश के ज्यादातर थानों में इस तरह के सेटलमेंट का खेल चलता हो रहता है।

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