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दसे दशहरा बीसे दिवाली, गड्ढेदार और अंधेरी सड़को पर मवेशियों के झुंड से टकरा त्योहार मनाए जनता बेचारी


0 हिन्दू पर्वो के इंतजाम को लेकर प्रशासन का रवैया उदासीन
0 सड़को पर अंधेरा कायम मवेशियों के झुंड से टकरा लोग हो रहे घायल

बिलासपुर। जिला और निगम प्रशासन के अफसर हिंदुओ के त्योहार पर व्यवस्था बनाने कितने संजीदा है आप भी देख लीजिए। नवरात्र दशहरा और दुर्गा विसर्जन पर गड्ढेदार सड़को पर ठप स्ट्रीट लाइटे गाड़ियों की लाइटों के भरोसे जाम के बीच रेंगती ट्रैफिक और जगह जगह सड़को पर पसरे मवेशियों के झुंड। ये तस्वीरें है 70 वार्डो वाले स्मार्ट सिटी की जिसका जोरदार प्रचार प्रसार कराया गया था कि अब पूरे शहर के वार्डो को स्मार्ट सिटी में शामिल कर लिया गया है।

इंटरनेट मोबाइल के जमाने मे घड़ी टावर और डॉक्टर अब्दुल कलाम प्लेनेटेरियम करोड़ो रूपये फूक खटाखट खड़ा कर दिया गया, वही नागरिकों की आवश्यक सुविधाओ वाले सड़को पर गड्ढे ही गड्ढे है। आमजन इन्ही गड्ढेदार और अंधेरा पसरे सड़को पर आवागमन करने विवश है।इन्ही गड्ढेदार और अंधेर नगर की सड़को पर देवताओं में प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी की स्वागत और विदाई की गई। जगतजननी माँ दुर्गाजी की स्वागत और विदाई रावण दहन सब हो गया। आप इन तस्वीरों में खुद देखिए ये नजारा शहर के मुख्यमार्ग कहलाने वाले गोलबाजार सदर बाजार की नही बल्कि राजकिशोर नगर बसन्त विहार चौक की है वो भी दशहरे के रात की। स्ट्रीट लाइटे ठप पड़ी है अंधेरा है और जाम भी लगा है राहगीरों को केवल गाड़ियों के लाइटों का ही सहारा है जिनके भरोसे लोग आवागमन करते रहे।


कोई इंतेजाम नही


रविवार को भाजपा के एक नेता ने कॉल कर बताया कि शहर के मुख्य विसर्जन स्थल पचरीघाट में माँ दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए कोई व्यवस्था नही की गई है जिससे समिति के लोगो मे आक्रोश है। सफाई तक नही कराई गई न वहाँ गड्ढा कराया गया गन्दे बदबूदार पानी को पचरी की तरफ मोड़ दिया गया और नीचे बांधकर जाल डाल दिया गया यहाँ विसर्जन के लिए केवल एक क्रेन लगाया गया है जिसमे बांधकर प्रतिमाओं को नदी में छोड़ा जा रहा।


और ये रहे मवेशी


ये तस्वीरें राजकिशोर नगर शनिमंदिर के सामने मेनरोड की है। यही से तोरवापुल के लिए मोड़ है। आप खुद देखिए कैसे सड़क को घेर मवेशी बैठे है। जबकि यहाँ से थोड़ी ही दूरी पर शहरी गोठान है।


मामला चारा घोटाले का


बताया जाता है कि मामला चारा घोटाले का है चारा पानी का प्रबंध नही इसलिए मवेशियों को शहरी गोठान से भी खदेड़ दिया जाता है जिसके चलते ये मवेशी तोरवा पुल शनिमंदिर के सामने से लेकर मोपका मेनरोड में डेरा जमा लेते है।


और ऐसा पहली बार हुआ है


सन 2018 से पहले तक जब भी विधानसभा के चुनाव होते थे जम्बो योजनाओं के लिए सड़कों पर कराई जा रही खुदाई को रुकवाकर सड़को पर डामरीकरण और स्ट्रीट लाइटों को व्यवस्थित कर शहर को चकाचक दिखाने की कोशिश की जाती थी।
लेकिन धान किसान के हावी होते मुद्दे और मुफ्त की रेवड़ियों के कल्चर में सरकारों को जतला दिया कि सड़क नाली नही जनता स्वहित चाहती है इसलिए इस बार विधानसभा चुनाव के पहले न तो सड़को पर डामर की परतें चढ़वाई गई और न ही स्ट्रीट लाइटो पर ध्यान दिया गया तभी तो अंधेरा कायम है।

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शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
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