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सुपर प्रभारी मंत्री-5, म्युचुअल ट्रांसफर का फूटा भांडा, चतुर्थ श्रेणी कर्मी हितेश बिलासपुर तहसील से लापता, गुलाब कोटा में दे रहा ड्यूटी

0 मौखिक आदेश की है चर्चा एसडीएम को पता नहीँ

0मामला प्रभारी मंत्री के अनुमोदन सूची के चर्चित गड़बड़झाले का

*बिलासपुर। न्यायधानी के जिला मुख्यालय से प्रभारी मंत्री के ट्रांसफर अनुमोदन सूची में 10 के बजाय 11 कर्मचारियों का पुछल्ला जोड़ने और कोटा व बिलासपुर तहसील के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के म्युचुअल ट्रांसफर का मामला और सडबड़ा गया। यहाँ जिस कर्मचारी को भेजा गया था उसने ज्वाइनिंग ही नही दी, बताया जा रहा कि मामले के तूल पकड़ने के बाद उसे भी मामले को ठंडा करने वही कोटा में संलग्न कर दिया गया, वो भी मौखिक आदेश पर।
प्रभारी मंत्री के अनुमोदन पर 11 वे नम्बर पर मोहतरा बिल्हा के पशु चिकित्सा विभाग की जिस महिला कर्मी का तखतपुर सिंघनपुरी ट्रांसफर किया गया। उसे तो प्रशासनिक आदेश होना बता टाल दिया गया कि इसके लिए आवेदन की जरूरत नही है। लेकिन कोटा के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का क्या जिसका ट्रांसफर आपसी सहमति से होना बताया जा रहा। यदि उसने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया है और ये ट्रांसफर उसके आवेदन पर हुआ है, तो फिर वह अपना स्थानांनतरण रुकवाने अफसरों और मंत्रियों से गुहार क्यो लगा रहा।अब उस चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के इस आवेदन की इस प्रति को देखिये…

चतुर्थ श्रेणी  पीड़ित कर्मी हितेश ने उपमुख्यमंत्री अरुण साव को दिया ट्रासफर निरस्त करने आवेदन

और ये है वो ट्रांसफर आदेश जिसमे उसका ट्रांसफर आपसी सहमति से उसके गृहग्राम कोटा से बिलासपुर तहसील करना दर्शाया गया है…


फिर सच है क्या आरोप गम्भीर है शोषल मीडिया का जमाना है अफसर,नेता, मंत्री सब तक खबरे पहुच रही सब देख और पढ़ रहे पर अभी तक न इस फर्जीवाड़े के आरोपो पर शासन- प्रशासन ने कोई संज्ञान लिया न विपक्ष ने इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया दी…
और अब तो हद ही हो गई, म्युचुअल ट्रांसफर का भी मुचलका हो गया, फजीहत हुई तो जिस कर्मचारी को बिलासपुर तहसील में आपसी सहमति पर तबादले पर भेजा गया था बताया जा रहा कि वह बिलासपुर तहसील आया ही नही कहा जा रहा कि वह भी मौखिक आदेश पर वही कोटा तहसील में ड्यूटी दे रहा।
सोमवार को सीजीडीएनए की टीम ने तहसील कार्यालय के नाजिर शाखा और स्टाफ से जानकारी ली तो पता चला कि यहां जिस चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को तबादले पर भेजा गया था वो आज तक यहाँ आया ही नही।
इस मामले में जब एसडीएम मनीष साहू से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा दिया कि इसकी जानकारी उन्हें नही है, ये वरिष्ठ कार्यालय का मामला है वे ही बताएंगे।

सवाल यह उठ रहा कि जब हितेश ने सहमति पत्र पर दस्तखत ही नही किया, तो उसका म्युचुअल ट्रांसफर हुआ कैसे, और यदि उसने सहमति दी तो फिर वह अपना ट्रांसफर रुकवाने मंत्री को आवेदन क्यो ढिया?

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पता नही क्यो वह झूठ बोल रहा उसने खुद सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया है, उसी आधार पर उसका ट्रांसफर हुआ है।

एसएस दुबे

नजूल अधिकारी व स्थापना एवं वित्त प्रभारी जिला मुख्यालय बिलासपुर

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शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
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