
बिलासपुर. सीपत एनटीपीसी के प्रभावित ग्राम कौड़िया के करीब 50 किसान यहाँ के राखड़ डैम से होने वाले जल रिसाव के चलते दलदल में तब्दील अपनी कृषि भूमि का इस साल मुआवजा न मिलने पर मुआवजे की मांग को लेकर फिर पूर्व सरपंच रेखा धर्मेंद्र श्रीवास्तव के नेतृत्व में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने पहुँचे।


इन किसानों का कहना कि डेम से होने वाले पानी के रिसाव के कारण उनकी खेतिहर जमीनें दलदल में तब्दील हो गई है, जिसमे कोई फसल नही होती इसलिए वे इसके बदले एनटीपीसी से मिलने वाले मुआवजे पर निर्भर हैं। वर्ष 2011 से अब तक उन्हें हर साल दलदली भूमि के लिए क्षतिपूर्ति राशि दी जाती रही, लेकिन इस वर्ष बिना किसी सूचना के किसानों के नाम सूची से हटा ढिया गया कहा जा रहा कि उनके के खेत दलदल नही बल्कि सूखे है, किसानों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंप आग्रह किया कि उन्हें वर्ष 2024-25 का मुआवजा अविलम्ब दिलाया जाय ताकि वे अपने परिवार का भरण पोषण कर सके और आगामी वर्ष 2025-26 की भी क्षतिपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। उनका कहना है कि वर्तमान में जमीन खेती लायक नहीं है और बरसात का समय नजदीक होने से उन्हें इस बार भी मुआवजे की तत्काल आवश्यकता है।किसानों ने बताया कि वे पहले ही उधार लेकर गुजारा कर रहे हैं। ऐसे में अगर इस वर्ष भी मुआवजा नहीं मिला तो उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो जाएगा। लगभग पांच वर्ष पूर्व एनटीपीसी सीपत प्रबंधन ने मौखिक आश्वासन दिया था कि यदि मुआवजा नहीं मिलता तो वे किसानों की भूमि को फिर से कृषि योग्य बनाकर देंगे, लेकिन अब तक ऐसा कोई कार्य नहीं हुआ। किसानों ने कलेक्टर से यह भी आग्रह किया है कि यदि वर्ष 2026-27 के लिए भी मुआवजा नहीं दिया जाना है, तो एनटीपीसी सीपत को यह निर्देशित किया जाए कि वह प्रभावित भूमि को खेती लायक बनाए।

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