0 प्रशासन पर दबाव में काम करने लगाया आरोप


0 कहा आरपार की लड़ाई के लिए तैयार चाहे जेल जाना पड़े



बिलासपुर । न्यायधानी बिलासपुर की सियासत देखकर राजनीति के प्रकांड पंडित लंकापति रावण भी संकट में है। दरअसल एक बार फिर दशहरे पर रावण दहन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मामला सरकंडा साइंस कॉलेज मैदान का है जहां पिछले वर्ष तक अरपांचल लोक मंच समिति द्वारा रावण दहन का आयोजन किया जाता था, वहां इस बार प्रशासन ने किसी अन्य आयोजक को अनुमति दे दी।जिससे बड़ा लफड़ा खड़ा हो गया है। इससे भड़के अरपांचल समिति के अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने प्रेस क्लब में मीडिया से चर्चा कर पुलिस व प्रशासन पर दबाव में काम करने का आरोप लगा जेल जाने और न्यायालय का दरवाजा खटखटाने तक का ऐलान कर दिया ।
सोमवार को मीडिया से चर्चा करते हुए समिति के अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने कहा कि मंच पिछले कई वर्षों से साइंस कॉलेज मैदान में रावण दहन करता आ रहा है, लेकिन इस बार अचानक से मैदान का आवंटन सिद्धार्थ भारती नामक व्यक्ति को कर दिया गया है। जबकि मंच ने अनुमति के लिए पहले ही आवेदन दे चुका है, बावजूद इसके कॉलेज प्रबंधन और प्रशासन ने दूसरे आवेदन को मंजूरी दे दी। उन्होंने प्रशासन पर दबाव में काम करने और दबाव डालन वाला चेहरे के जल्द बेनकाब होने की बात कही।
सिद्धांशु ने कहा कि“भले ही जेल जाना पड़े, लेकिन रावण दहन वहीं होगा। प्रशासन की एकतरफा कार्रवाई अस्वीकार है आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे और बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला से इसको लेकर मुलाकात करेंगे।” उन्होंने फिर कहा कि
ये लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है यदि प्रशासन अपने निर्णय पर अड़ा रहा, तो वे संघर्ष के लिए तैयार है।
गौरतलब है कि राजनीति के कारण बुराई पर अच्छाई की जीत के महापर्व दशहरे पर रावणी विवाद का ये इतिहास न्यायधानी के लिए कोई नया नही है, इससे पहले भी भाजपा शासनकाल के दौरान जब कांग्रेस की नगर सरकार थी और श्रीमती वाणीराव नगर की मेयर थी तब भी रावण का लफड़ा हुआ था खूब बमचक भी मचा अब तो मामला इसे कोर्ट में घसीटने की खुली चुनौती तक पहुच गया…?
इस बखेड़े ने पुलिस और प्रशासन के लिए भी विकट स्थिति खड़ा कर दिया है, अब गेंद प्रशासन के पाले में है,,, पर मामला इतना हल्का भी नही कि फर्जी EWS कांड और प्रभारी मंत्री के अनुमोदन में पुछल्ला जोड़ तहसील के दो भृत्य के ट्रांसफर और दोनो के यहां से नदारद होने की तरह बकरे के बजाय नींबू की बलि दे टरका ढिया जाय।
कही ब्लड मून का दुष्प्रभाव तो नही…?
चर्चा ये है कि ये कही हाल ही में हुए चन्द्रग्रहण का दुष्प्रभाव तो नही, जिसके कारण शांतिप्रिय न्यायधानी में ये लफड़ा हो रहा है, ज्योतिषियों ने इस चन्द्रग्रहण को तंत्र साधको के लिए उपयुक्त बताया था सवाल यह उठ रहा कि ऐसा है तो ये तंत्र क्रिया करा कौन रहा?
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