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रावणी विवाद ने बढ़ाई प्रशासन की टेंशन, प्रेसवार्ता के बाद कलेक्ट्रेट के प्रदर्शन और घेराव तक पहुँच गया मामला, खुला ऐलान भी

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बिलासपुर। रावणी लफड़े ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है, रावण को टेंशन ही नही वो जलाए तो कि ये जलाए तो जलना लंकापति को ही है, इस लफड़ाव्यू के रचयिता को भी कोई टनटा नही क्योकि उनका तो लिखापढ़ी में कोई हस्ताक्षर ही नही है, पर संकट तो प्रशासनिक अफसरों का है, हालांकि वो भी जानते है कि जीतेगा दुर्योधन ही, पर कही मामला बिगड़ गया तो जवाबदेही तो उनकी ही होगी बस यही संकट है।
बिलासपुर में रावणी युद्ध कोई नया तो है नही तत्कालीन मेयर वाणीराव के कार्यकाल में भी निगम के पुलिसलाइन में होने वाले दशहरा उत्सव के दौरान भी, बीजेपी वर्सेज कांग्रेस के बीच भी रावणी बखेड़ा हुआ था तब वे कांग्रेस में थी वर्तमान में वे बीजेपी में है।
ऐसा नही कि रावणी लफड़ा केवल बिलासपुर में है, रतनपुर से भी ऐसे ही कहानी सामने आ रही, क्योकि जिस शनिचरी बाज़ार में सालो से रावण के प्रतीकात्मक पुतले का दहन किया जाता था, वो बाजार निजी जमीन उलट गई, घेराबंदी हो गया इसके सौदे की खबरे भी आ रही कुल मिलाकर यहाँ भी संकट दशानन रावण पर है…
यहाँ लफड़ा इस बार साइंस कॉलेज मैदान को दूसरी पार्टी को आबंटित करने का है, जबकि यहाँ पिछले कईं सालो से अरपांचल मंच के दावा दशहरा महोत्सव का आयोजन किया जाता रहा,
मैदान को किसी दूसरे सन्गठन को आबंटित करने को लेकर मंच के पदाधिकारी ने प्रेस वार्ता कर प्रशासन पर राजनीतिक दबाव में ऐसा करने का आरोप लगाया चैलेंज किया गया कि चाहे जेल जाना पड़े चाहे कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़े वे हर स्थिति के लिए तैयार है, इसके बाद कांग्रेस और सर्वदलीय मंच के बैनर तले कलेक्ट्रेट में जंगी प्रदर्शन कर धरना दे प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर ऐलान किया गया कि चाहे कुछ भी हो जाये रावण वही दहन होगा…
कुल मिलाकर अब गेंद तो प्रशासन के पाले में है, पर इस रावणी सियासत में सह किसकी होगी और किसकी मात सब यही नजर गड़ाए है…

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