0 पब्लिक पूछ रही कहा नही लग रहा जाम
0 एम्बुलेंस तक फंस रहे, टाटा कंपनी की योजना और दावे के हाल बेहाल
0 बाइक तो मुख्यमार्ग से निकल नही पा रही कैसे निकलेगी इलेक्टिक सिटी बसें
0 शासन के अरबो खरबो की बर्बादी का नही कोई जिम्मेदार


बिलासपुर । रहने को घर नही…और झूमर की खरीदी, कुछ ऐसा ही हाल है स्थानीय निकाय नगर पालिक निगम प्रशासन और बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड का। फेल्वर योजनाओं के पहाड़ और न्यायधानी, महानगर, हमर बिलासपुर, स्मार्ट सिटी के गौरव से गौरवान्वित इस शहर का आलम ये है कि यहां न तो चलने के लिए सड़कें है और न ही जरूरत के हिसाब से है, इतने सालों में नई कालोनियां बसी, शहर का दायरा बढा आबादी बढ़ी तो सड़को पर गाडियों की संख्या कई गुना बढी पर नई सड़को के लिए कोई प्लानिंग ही नही की गई। नतीजतन पूरे शहर में जाम के हालात है, यातायात पुलिस ने चौक- चौराहों पर बेरिकेटिंग ठोक दिया। समझना होगा कि शहर को 173 करोड़ की इंटीग्रेटेड ट्रेफिक मैनेजमेंट सिस्टम की नही नई सड़को की जरूरत है।

लिंगियाडीह पुल और दयालबंद तिराहे के बीच रोज लगता है ऐसे जाम

पिछले 20 सालों से लंदन के टेम्स नदी की तर्ज पर अरपा के दोनों तट पर सड़क बनवाने का सब्जबाग उड़ाया गया पर इतने सालों में यहां किलो दो किलोमीटर सडक ही बन सकी, वो भी 1 साइड, ज्वाली नाले के ऊपर वैकल्पिक मार्ग का भी निर्माण कराया गया पर उसका हाल भी सारा शहर देख रहा, बृहस्पति बाजार के पीछे वैकल्पिक रोड का स्लैब कई महीनों से टूटा पड़ा है, सड़क पर कही गाड़िया खड़ी है तो कही मलबा रखा है, सड़क जगह-जगह ऊधड – धंस गई है,
इंटेलीजिजेट ट्रफिक मैनेजमेंट सिस्टम सरकार और पुलिस विभाग के लिए लक्ष्मीपुत्र तो आमजन के लिए व्हाइट एलिफेंट बनकर रह गया है, गाड़ी ने बिलासपुर की सड़क का मुंह तक नही देखा और यूपी के आगरा के वकील के कार की कट गई चालान, कार का चालान भेजने पर स्कूटी का नम्बर निकलने का मामला भी उस समय खूब चर्चा में रहा… आमजन अलग हलाकान है कि 2000-5000 का ऑनलाइन मैसेज और लिफाफा आए दिन घर पहुँच रहा।
कैसे निकलेगी सिटी बसें
बिलासपुर यातायात सार्वजनिक सोसायटी की पुरानी और कंडम के बसों की जगह कई महीने से नई इलेक्ट्रिक बसें आने का हल्ला चल रहा पता नही कृपा कहा अटक गई। मीडिया में भी खबरें चली पर EV सिटी बसों का अब तक अतापता नही और आ भी गई तो चलेगी कैसे क्योकि शहर की कोई सड़क सिटी बस निकलने लॉयक नही, बाइक नही निकल पा रही, सड़क पर जगह-जगह एम्बुलेंस जाम में सायरन बजाते खड़े है।
सवाल यह उठ रहा कि फिर क्यो सार्वजनिक यातायात के लिए बसों के बजाय शहर के हालात और बेरोजगारों को रोजगार देने छोटी परिवहन वाहल को बढ़ावा देने पहल क्यो नही की गई…
इंटरनेट के ज़माने में क्या प्लेनेटोरियम और घड़ी चौक का निर्माण सही है*
नेहरू चौक के घडीघर और व्यापार विहार के प्लेनेटोरियम में तब करोड़ो फूक दिये गए जब हर हाथ मे टाइम देखने के लिए मोबाइल सेट है लोग घड़ी पहनना छोड़ दिए, देश के पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत मिसाइल मेंन एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर करोड़ो के तारामंडल का हाल देख लीजिए 10 लोग नही जुटते, करोड़ो के विवादित पड़े अधूरे भवन सोचिए इन पर करोड़ो रूपये फूक डिये गए।
सीवरेज, जलावर्धन योजना, अमृत मिशन जैसी तमाम फेल्वर योजनाए है, अहिरन नदी से अरपा को जोड़ने की योजना का अतापता नही पूरे शहर की सड़के फिर पाइप लाइन डालने के लिए खुदवा दी गई, हालांकि खूंटाघाट से अभी शहर के लिए जल लेकर आपूर्ति की जा रही लेकिन कब तक क्या ये पर्याप्त है ये भी सबको पता है, करोड़ो के सौन्दर्यीकृत तालाबो का हाल, उखाड़े गए सिटी बस स्टॉपेजो के हाल इन रुपयों से शहर को चकाचक किया जा सकता था पर सब बर्बाद हो गया, पब्लिक का पैसा व्यर्थ चला गया, पर जिम्मेदार कोई नही।
सवाल आपका है आपके अपनो का है
अब ये भी जान लीजिये कि ऐसे में किसी को सिम्स या सिम्स से अपोलो में इलाज की जरूरत पड़े इमरजेंसी हो तो एम्बुलेंस निकलकर समय पर गंतव्य पर पहुच जाए और मरीज या घायल को त्वरित इलाज मिल जाये इसकी कोई गारंटी नही। सीपत रोड या पंडित देवकीनन्दन मुक्तिधाम रॉड से एम्बुलेंस निकलने में आपको मुक्तिधाम चौक, इधर सीपतरोड में अशोक नगर चौक, आरके पेट्रोल पंप चोक, बैमा- नगोई चौक, चिंगराज बहतराई चोक फिर बसन्त विहार चौक मेंजाम में फसना पड़ेगा। इधर सदर बाजार, गोलबाजार, जूना बिलासपुर ज्वाली पल से हटरी चौकनके बीच, हटरी चौक से नागोराव शेष स्कूल चौक, गांधी चौक, दयालबंद- टिकरापारा मोड़ चौक फिर लिंगियाडीह पुल मोड़ चौक पर एम्बुलेंस जाम में फंस रही और फंसेगी ही। इधर गोड़पारा, बाल्मीकि चौक, शनिचरी रपटा, चाँटीडीह शराब भट्टी, चिंगराजपारा अमरिया चौक, भारतमाता चौक पर दिन भर जाम के हालात बने रहते है।
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