बिलासपुर । सेंट्रल यूनिवर्सिटी का संकट टलने का नाम नही ले रहा। परिसर के तालाब में मिली छात्र के लाश को लेकर चल रहा बवाल अभी शांत हुआ नही और फिर एक प्रोफेसर की रहस्यमयी हालात में मौत हो गई।
अब बॉटनी विभाग के प्रोफेसर डॉ. नरेंद्र कुमार मिश्रा की मंगलवार सुबह संदिग्ध परिस्थितियों में उनके क्वार्टर में लाश मिली है, वे यहां तीन साल से पदस्थ थे और अकेले कैंपस के आवासीय परिसर में रहते थे।
गौरतलब है कि 15 दिन पहले यूनिवर्सिटी परिसर के तालाब में बीएससी फिजिक्स के छात्र अर्सलान अंसारी की सन्दिग्ध लाश मिली थी।
ये बताई जा रही कहानी
बताया जा रहा कि मंगलवार सुबह करीब 6 बजे फिजिक्स विभाग के डीन डॉ. एच.एस. तिवारी मॉर्निंग वॉक पर निकले तो उन्होंने प्रो. मिश्रा के क्वार्टर से कराहने की आवाज सुनी। उन्होंने गार्ड प्रभारी बाबूराम खत्री को तलब किया तो
दरवाजा अंदर से बंद था। खिड़की का शीशा तोड़कर सिटकिनी खोली गई तो प्रो. मिश्रा फर्श पर गिरे पड़े थे सांस चल रही थी, यूनिवर्सिटी को सूचना दे एम्बुलेंस बुलाया गया पर एंबुलेंस में न तो स्ट्रेचर था और न ही ऑक्सीजन सिलेंडर गार्ड बाबूराम और कर्मचारी बृजेश किसी तरह उन्हें सिम्स लेकर पहुँचे तब डॉक्टर ने उन्हें मृत’ घोषित कर दिया।
परिजनों ने जताया सन्देह
सूचना पर प्रो. मिश्रा के पुत्र अवनीश मिश्रा और परिजन शाम को बिलासपुर पहुंचे। अवनीश ने बताया, “रात में पापा से फोन पर बात हुई थी। वे पूरी तरह ठीक थे।
कैंपस में भय का माहौल
15 दिन में एक के बाद एक छात्र और प्रोफेसर ही मौतों से यूनिवर्सिटी परिसर में शोक और भय का माहौल है, तरह-तरह की चर्चाएं चल रही है।
घोर लापरवाही का आरोप
परिजनों और सहयोगियों ने एम्बुलेंस में स्ट्रेचर और ऑक्सीजन सिलेंडर न होने को लेकर नाराजगी जताते हुए इसे
प्राथमिक चिकित्सा व्यवस्था की घोर लापरवाही बताया है।

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