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अथ श्री धान खरीदी कथा, टूटी कम्प्यूटर ऑपरेटरों की हड़ताल, 18,700 का नया भार, ज्यादातर केंद्रों में लटक रहे ताले, कौन सुने किसानों के दर्द भरे नाले

0 कोई नही है सोसायटी में नेता और अफसर पड़े निरीक्षण के ढिंढोरे के चक्कर मे

0 जो खुले है वहां कम्प्यूटर, तराजू और टोकन आईडी का तक आतापता नही

बिलासपुर किसानों के चेहरे पर खुशहाली और भाजपा नेताओं के धान खरीदी केंद्र के निरीक्षण की तस्वीरों की हकीकत क्या है, मेलोडी खाओ खुद जान जाओ टाइप है। हकीकत ये है कि बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के सोसायटियों के पट तक नही खुले है, जहां खुले है वहां न तो कम्प्यूटर का पता है न टोकन का, सरकार के लिए अच्छी खबर ये है कि चमकौव्वल के चक्कर मे कई कम्पूयटर ऑपरेटर काम पर लौट आये पर इसके उलट ये भी संकट है कि 18,700 मासिक के नए ऑपरेटर तक भर लिए गए, यानि हालात बरा का तेल बरी में निकालने जैसा हो गया, समर्थन मूल्य और बोनस की मार से पहले ही बेहाल सरकार को अब नए ऑपरेटरों के लिए अलग फंड जुटाना पड़ेगा। ये तो रही मुद्दे की बात अब इन तस्वीरों में धान खरीदी केंद्रों का नजारा भी देख लीजिए…

सीजीडीएनए की टीम ने मंगलावर 18 नवम्बर को बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के सेलर, बामहू और टेकर सोसायटी का जायजा लिया….

ये है हालात

सेलर सोसायटी-

क्षेत्र के सेलर सोसायटी में जगह कम होने के कारण अब गैस गोदाम के पास घेराबंदी कर नया खरीदी केंद्र बनाया गया है, पर यहां ताला लटका रहा है…

दो पेड़ की बलि नई सोसायटी के नाम

देश के प्रधानमंत्री ग्लोबल वार्मिंग के प्रति आमजन को जागरूक करने एक पेड़ माँ के नाम का संदेश दे वृक्षारोपण का संदेश दे रहे है, वही सेलर के नई सोसायटी के लिए रास्ता बनाने बबूल के दो हरे भरे पेड़ो की बलि दे दी गई।

बामहू सोसायटी

बामहू धान खरीदी केंद्र में बामहू और खैरा डंगनिया के किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचते है, यहां ऑफिस तो खुला रहा, स्टाफ भी तैनात रहा, बारदानों का बंडल भी दिखा पर धान खरीदी की तैयारी का नजारा और चर्चा जोरों पर रही, पूछने पर स्टाफ ने बताया कि अभी यहां न तो कम्यूटर आया है न तराजू बॉट और तो और अभी तक धान को नमी से बचाने के लिए बेस बनाने भूसी और टोकन के लिए आईडी तक नही दी गई है।

टेकर केंद्र में पसरा सन्नाटा, लगा रहा ताला

बामहू केंद के बगल में ही टेकर का सोसायटी है, जहां गोपालपुर भिल्मी और पांडेपुर इलाके के किसान धान बेचते है, पर हालात वही तालेबंदी की रही।

खरीदी की तैयारी है केवाईसी और रकबा का चक्कर जारी है

सरकार और सरकारी तंत्र का जवाब नही है, धान खरीदी शुरू हो गई और किसान अभी तक केवायसी के लिए बैंक और ऑनलाइन रकबा चढ़वाने तहसील कार्यालय के चक्कर मे उलझा है।

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शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
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