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डेयरी वाले नही थे तैयार, उसी, वीरान और अभावग्रस्त इलाके में वामनावतारो ने 16-17 साल में तान दिए कालोनी और मकान, अनाप-शनाप बढ़ गए जमीन के दाम…

बिलासपुर,,, अमेरी की जिस भूमि में मवेशी तक रहना पसंद नही करते थे! मतलब कोई डेयरी संचालक जाने तैयार नही थे।उसी एरिया में अब लोग रह रहे। 17- 18 साल में यहाँ बड़ी- बड़ी कॉलोनियां तन गई जमीनों के रेट     1500 से 2000 रुपये वर्गफुट पहुँच गए।

सरकार ने शहर को गन्दगी और मच्छर मुक्त करने  गोकुल धाम योजना के तहत गोकुल धाम बसाने क्रियान्वयन एजेंसी नगर निगम को 25-30 एकड़ भूमि और करोडो दिए, ताकि  डेयरी का मॉडल बनवाकर शहर के गौ पालकों को आकर्षित कर उनकी डेयरियों को यहां गोकुल नगर में शिफ्ट करा शहर को मवेशी मुक्त बनाया जा सके। योजना का क्या हाल रहा पूरे शहर ने देखा, प्रशासन ने इन 16-17 सालो में क्या और कितना प्रयास गोकुल धाम को बसाने किया ये भी किसी से छिपा नही है, पिछले डेढ़- पौने दो दशक में अफसर यहाँ मुड़कर देखने तक नही गए, जिसकी गवाही शहर के अंदर संचालित डेयरियां और शहर व शहर से लगे क्षेत्र की सड़कों पसरे मवेशियों के झुंड दे रहे…
       योजना का हाल देख जमीन कारोबारियो, कतिपय अफसरो और इन्वेस्टरों ने यहां वामनावतारो की तरह जमीने खरीद डाले,,, कालोनिया बसाने, प्लाट काटने और मकान बनाकर बेचने दाव लगा दिया। राजस्व विभाग के अफसरों की कलम मौके पर पूरे खेल की गवाही दे रहा…

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