0 कंगाल नही मालामाल है न्यायधनी का नगर निगम
0 सड़के बदहाल, सौंदर्यीकरण के नाम पर बहा रहे फंड


बिलासपुर। कुप्रबंधन ठेका फर्मो की बेगारी और बेलगाम अफसरशाही ने निगम को कंगाल बना डाला। तमाम फेल्वर योजनाओं के बावजूद सालों से यहाँ जमे ऐसे अफसर न सिर्फ दोनों सरकारों के चहेते रहे बल्कि चुनाव आयोग का राडार भी इनकी कुर्सियों तक नही पहुँच पाया।
जम्बो फेल्वर योजनाओं सीवरेज अरपा प्रोजेक्ट जलआवर्धन अमृत मिशन गोकुल धाम ट्रांसपोर्ट नगर समेत सारी जम्बो योजनाएं अरबो रुपये खर्च करने के बाद भी अधूरे पड़े है। न तो इन फेल्वर योजनाओं के लिए कोई जिम्मेदार है न किसी के खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई की गई। तमाम फेल्वर योजनाओं के बाद भी जिम्मेदार अफसर कुर्सियों पर जमे है उनका बाल तक बांका नही हुआ।
ताज्जुब की बात तो यह है कि छत्तीसगढ़ बनने के बाद इन 24 सालों की बात करे तो दोनों प्रमुख दल की सरकारें रही पर इन सरकारों को इन तमाम खामियों के बावजूद यही अफसर प्यारे रहे। इन 24 सालों में विधान सभा और 5 लोकसभा के चुनाव हुए लेकिन चुनाव आयोग का डंडा भी इनका कुछ नही बिगाड़ पाया नतीजतन पूरे शहर का हुलिया बिगड़ गया। अफसर स्मार्ट सिटी महानगर और हमर बिलासपुर के नारों से दीवार पुतवा कर और सौंदर्यीकरण के नाम पर पैसा बहाते रहे। सड़क बिजली नाली पानी जैसी मूलभूत समस्याएं करोड़ो बहाने के बाद भी यथावत है।

कंगाल नही है निगम

सारा शहर देख रहा कि कैसे टुटही स्कूटर और सायकल से चलने वाले निगम के अफसर और ठेकेदार चमचमाती गाड़ियों में घूम रहे । पर शहर के हालात में कोई तब्दीली नही आई निगम के पास व्यापार विहार बस स्टैंड राजकिशोर नगर समेत अन्य इलाकों में बड़े बड़े व्यवसायिक काम्प्लेक्स और गोलबाजाए सदर बाजार समेत अन्य इलाकों में लगभग 3000 से अधिक दुकाने है। निगम प्रशासन के पास असीमित शक्तिया है अमला है इसके बावजूद इन दकानो का किराया प्रीमियम और सम्पत्ति कर का करोड़ो में बकाया है। निगम प्रशासन यदि ठेके का खेल छोड़ सख्ती और पेनाल्टी पर ही टारगेट कर दे तो स्थिति बदल जाएगी।
और 10 करोड़ से ज्यादा टीएनसी के पास
निगम के जानकारों के मुताबिक अवैध निर्माण और अवैध कालोनियों के नियमितीकरण का 10 करोड़ से अधिक की रकम टाउन और कंट्री प्लानिग कार्यालय के खाते में जमा है। कहा जा रहा कि यदि यही रकम निगम के खाते में ट्रांसफर कर लिया जाय तो पैसा ही पैसा है।
बन्द हो ठेका प्रथा और बेगारी
निगम के कर्मचारी संगठन ठेका और संविदा प्रथा को बन्द करने आंदोलन तक कर चुके है। उनका कहना है कि सफाई से लेकर कचरा उठाने से तक का ठेका दीगर प्रान्त की कम्पनियों को दे दी गई हैं। इससे नए पढ़े लिखे युवाओ को नौकरी और रोजगार नही मिल पा रहा युवा रोजगार की तलाश में कुंठित हो रहे। शासन को ठेका प्रथा और संविदा प्रथा बन्द करना चाहिए ताकि स्थस्नीय बेरोजगारों को नौकरी और रोजगार के अवसर मिल सके। वैसे भी ठेके नाम पर निगम के वाहन और अमले से केवल बेगारी ही कराई जा रही है।
ये है म्युनिसिपल करोरेशन के मूल कार्य
म्युनिसिपल कारपोरेशन यानी नगर निगम का मुख्य काम, शहर में बेहतर जीवन जीने के लिए ज़रूरी सेवाओं को उपलब्ध कराना है. नगर निगम के कुछ प्रमुख काम ये रहे:
नगर नियोजन और शहरी योजना तैयार करना
सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता, और शिक्षा जैसी सेवाएं देना
पर्यावरण को बचाने और नागरिकों को पारिस्थितिक मोर्चे से जोड़ना
सरकारी और विकास योजनाओं को लागू करना
भूमि उपयोग और भवनों के निर्माण को नियंत्रित करना
आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए योजना बनाना
अग्निशमन सेवाएं देना
शहरी वानिकी और पर्यावरण की सुरक्षा करना
कमज़ोर वर्गों के हितों की रक्षा करना
स्लम सुधार और उन्नयन करना
शहरी गरीबी कम करना
पार्क, उद्यान, और खेल के मैदान जैसे शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराना
सांस्कृतिक, शैक्षिक, और सौंदर्य पहलुओं को बढ़ावा देना।
शिक्षा गई स्वास्थ्य से छुटकारे की नौबत
शहर में जनस्वास्थ्य के नाम पर निगम प्रशासन द्वारा आधा दर्जन से अधिक आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक व ऐलोपैथिक होस्पिटल और 5 स्कूल संचालित थे। निगम प्रशासन ने तो स्कूलों को शिक्षा विभाग के सुपुर्द कर दिया। डॉक्टरों के रिटायर्ड होने में बाद नई व्यवस्था नही बनाई गई इसलिए निगम के अस्पताल भी बन्द होते गये।वैसे भी तत्कालीन स्वास्थ्य अधिकारी डॉ ओमकार शर्मा के रिटायर्ड होने के बाद अब स्वाथ्य का मतलब केवल सफाई रह गया है। वर्तमान में केवल सर्वसवदानी पंडित देवक़ीनन्द दीक्षित के नाम पर श्याम टॉकीज के पास एक औषधालय संचालित है। चर्चा है कि यहां के डॉक्टर के रिटायरमेंट के बाद इस परिसर को व्यवसायिक परिसर बनाने की तैयारी है।
ये है निगम के खर्चे
सफाई निर्माण समेत निगम के सारे कार्य ठेके पर है। सफाई और कचरे के सम्पूर्ण निदान का काम करने वाली लायन सर्विसेज और एमएसडब्ल्यू सॉल्यूशन को लगभग 10 करोड़ मासिक भुगतान किया जा रहा।
इसके अलावा निगम के 310 -दैनिक टास्क – कर्मियों को मासिक 35 लाख
1370 प्लेसमेंट स्टाफ को 1 करोड़ 80 रुपये और लगभग 800 अफसरों और नियमित कर्मचारियो को मासिक 3.50 करोड़ का भुगतान किया जा रहा है।
फिर क्यो मार रहे गरीबो के परिवार का पेट
सवाल यह उठ रहा कि फिर क्यों हर माह वेतन के लिए निगम में संकट हो रहा। क्यो गरीब ठेका कर्मियों के तीन-तीन माह का पारिश्रमिक रोक 1 माह के पारिश्रमिक का भुगतान किया जा रहा। तय नियम के तहत ठेकेदार को हर माह श्रमिको को पारिश्रमिक का भुगतान कर बिल जमा करना है तब उनका बिल पास होगा। पर निगम में फंड नही और ठेकेदार अपने पास से देना नही चाहते। त्योहारों में हल्ला और मिडियाबाजी होती है तभी उन्हें भुगता होता है बाकी दिन कोई पूछने वाला ही नही है।
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