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धर्मराज भी डगमगा जाए न्यायधानी के नगर निगम का एक्ट और फैक्ट देखकर, 4400 को नॉट दर्शन गोलबाजार वाले को तत्काल चंदन, मामला अवैध निर्माण का…

बिलासपुर/ ,,,, पता नहीं न्यायधानी का नगर निगम किस एक्ट किस संविधान से चल रहा है! किसी के नियम विपरीत निर्माण के नियमितीकरण के प्रकरण 10-10 साल से लटक रहे तो किसी को बीच गोलबाजार में आंख में ग्रीन नेट झोंक बिना अनुमति कराये गए निर्माण को मंजूरी देने स्क्रिप्ट लिखी जा रही क्योकि भवन शाखा अधिकारी के जवाब से तो ऐसा ही लग रहा है।
कलेक्टर जनदर्शन के बोतल से बाहर आये गोलबाजार के अबैध निर्माण के मामले को वैध का जामा पहनाने कैसे कागजव्यू रचा जा रहा आप भी जान लीजिए, जिससे इस बात की साफ झलक दिखाई दे रही कि इन्हें तोड़ बताता कौन है, कि इधर अवैध निर्माण का नोटिस जारी होता है और उधर भवन अनुज्ञा का आवेदन जमा हो जा रहा। गोलबाजार के अवैध निर्माण के बारे में बताया गया कि आगजनी की घटना के बाद भवन निर्माणकर्ता संजय दुबे ने ये आवेदन दिया कि मरम्मत कार्य कराने की सूचना दी, और इसी सूचना के कागज पर सामने ग्रीन नेट टँगवाकर उन्होंने दो मंजिलां काम्प्लेक्स खड़ा करा दिया। जबकि यहाँ से महज 500 मीटर दूर जोन कार्यालय तो करीब 1 किलोमीटर दूर निगम मुख्यालय विकास भवन है।

ये है नियमितीकरण की हकीकत

प्रदेश के तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने ऐंन विधानसभा चुनाव के पहले शहरी क्षेत्र के ऐसे भवन मालिको को राहत देने ऐलान किया जिन्होंने नियम विपरीत निर्माण करा लिया हो और निगम के कागजी घोड़े की हिनहिनाहट से हलाकान थे। भूपेश सरकार ने सभी निकायों को ऐसे निर्माण को शुल्क लेकर नियमित करने निर्देश दिए, 9000 ऐसे निर्माणकर्ताओं ने अपने निर्माण के नियमितीकरण के लिए आवेदन दिये, 9000 में से 4600 भवन निर्माताओं के निर्माण को तो शुल्क लेकर वैधानिकता का सर्टिफिकेट दे दिया गया, कैसे नियमितीकरण हुआ जबको हल्ला है, और क्यो 4400 आवेदन लटका दिया गया सब जानते है।
जब प्रकरण सेम है तो वो 4400 आवेदन क्यो लटक रहे, ये तो अभी का निर्माण है, पब्लिक पूछ रही येनिगम का कैसा संविधान है।

उनको रियायत, इनको तुतारी ये कैसा सबका साथ

सरकार सबको आवास देने प्रतिबद्ध है, ताकि कोई बेघर न हो सबके सर पर छत हो। सरकार कम आय वर्ग के लोगो को तो रियायती दर और क़िस्त में आवास दे रही है, वही दूसरा वर्ग खुद की जमीन खरीद, खुद का पैसा लगा निर्माण करा रहा तो उनके साथ ऐसा व्यवहार क्यो और ऐसा पक्षपात क्यो…? इनके भी प्रक्रिया का सरलीकरण क्या नही होना चाहिए…..

और अरपा के दोनों तट के निर्माण का भी किस्सा…

निगम के भवन शाखा अधिकारी अनुपम तिवारी की माने तो
अरपा के दोनो तट पर निर्माणधीन भवन की अनुमति अरपा साडा से प्राप्त होना बताया जा रहा है, चाँटीडीह के भवन निर्माता किरणलता पिता गौरी शंकर साहू ने भूलवश अनुमति विरुद्ध निर्माण स्वीकारते हुए नियमितीकरण शुल्क देने की बात कही है। वही चौपाटी वाला निर्माणाधीन भवन माया जैसवानी का है इनसे दस्तावेज मंगाया गया है। गोलबाजार वाले निर्माणाधीन काम्प्लेक्स के लिए
संजय दुबे नोटिस जारी किया गया है और उन्होंने अनुमति के लिए आवेदन, नक्शा और अनुज्ञा शुल्क जमा करा समन शुल्क भी देने सहमति दी है, नजूल शाखा से प्रतिवेदन मंगाया गया कि रिकॉर्ड में अमर नाथ जड़ी बूटी वाली गली की चौड़ाई कितनी थी और अब कितनी है, रिपोर्ट आने के बाद आगे की प्रक्रिया की जाएगी।

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शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
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