0 ऑपरेशन के बाद निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती
0 बिना प्रशिक्षण बेरोजगारों से मवेशी पकड़वाने के दौरान हाईकोर्ट रोड में हुआ हादसा



बिलासपुर।आख़िर जिसका डर था वही हुआ बगैर प्रशिक्षण के रात में हाईकोर्ट रोड पर मवेशी पकड़ने निकले अतिक्रमण शाखा के ठेका कर्मी की जान जाते जाते बच गई। कार की टक्कर से घायल श्रमिक को आनन फ़ानन में निजी अस्पताल में लाकर भर्ती कराया गया है।
बताया जा रहा कि अतिक्रमण शाखा का स्टाफ शनिवार रविवार हाईकोर्ट रोड में को कैचर के साथ मवेशी पकड़ने निकला था। श्रमिक एक मवेशी को पकड़ने फंदा लेकर पकड़ने उसके पीछे दौड़ रहे थे तभी अशोक नगर निवासी अतिक्रमण शाखा के 45 वर्षीय ठेका श्रमिक मुकेश श्रीवास्तव को विपरीत दिशा से आ रही तेज रफ्तार कार टक्कर मारकर भाग निकली। जिससे उसके कंधे की हड्डी टूटकर सरक गई उसे तत्काल मिशन होस्पिटल रॉड के एक निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया। ऑपरेशन के बाद अब उसकी हालत स्थिर बताई जा रही।
सवाल यह उठ रहा कि बिना प्रशिक्षण के बेरोजगारों को मवेशी पकड़ने आखिर भेजा किसने उसके इलाज का खर्चा कौन वहन करेगा। विभागीय अफसर ठेकेदाद या निगम प्रशासन। बताया जा रहा कि अब तक उसके इलाज में 50- 60 हजार का खर्चा आ चुका है।


सीजीडीएनए न्यूज़ ने बिना प्रशिक्षण के बेरोजगारी की मार झेल रहे युवाओ से मवेशी पकड़वाने और इस तरह की अनहोनी पर सवाल उठा पूर्व में ही निगम प्रशासन का इस ओर ध्यान आकृष्ट कराने प्रयास किया था पर प्रशासन ने ध्यान ही नही दिया नतीजतन इस तरह की घटनाएं सामने आई शुरू हो गई है। समय रहते यदि ऐसे बेरोजगारों के प्रशिक्षण का इंतेजाम नही किया गया तो कभी भी इससे बड़ी कोई अनहोनी हो सकती है इसलिए निगम प्रशासन को इस ओर त *त्काल ध्यान देना चाहिए।

4 महीने में पारिश्रमिक और जान जोखिम का काम
सीजीडीएनए पहले भी इस आशय का खबर प्रसारित कर चुका है कि कैसे जानजोखिम में डालकर ठेका श्रमिको को हाड़ तोड़ मेहनत के बावजूद 4 माह का पारिश्रमिक रोककर 1 माह का भुगतान किया जा रहा। ये इतने निरीह श्रमिक है कि अपने परिवार की पेट की आग को बुझाने कोई भी खतरनाक काम करने तैयार है पर इन्हें मिल क्या रहा। अफसर ठेकेदार कभी एडवांस दर्शा तो कभी अफसेंट दर्शा इनका मेहनताना तक मार दे रहे है।
कोई सुनने वाला नही
इन ठेका श्रमिको के मेहनताने पर ठेकेदारो द्वारा एडवांस दर्शाकर 93 करोड़ की अफ़रा-तफरी का मामला भी सामने आ चुका है। 19 श्रमिको ने तत्कालीन उपायुक्त आरके पात्रे के समक्ष लिखित बयान भी दर्ज कराया उन्होंने जांच के बाद शिकायत को सही बता कार्रवाई की अनुशंसा कर ठेकेदारो पर दबाव भी बनाया लेकिन सत्ता और विपक्ष के रसूखदार ठेकेदारो ने उनका ही तबादला कर दिया और फिर मनमानी करने लगे।
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