0 ठप स्ट्रीट लाइट सड़क पर गड्ढे आलम मरता है कोई तो मर जाये जैसा

0 केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय से विकास के लिए फंड आने का दावा न गड्ढे भर रहे न कचरा उठवा पा रहे

बिलासपुर। ये स्मार्ट सिटी का अपोलो हॉस्पीटल जाने वाला मार्ग है। आप खुद देखिए कैसे धंसी सड़क पर हादसे का खतरा मंडरा रहा। रात को स्ट्रीट लाइट जलती नही इसलिये आसपास के लोगो ने गहरे गड्ढे से लोगो की जान बचाने दिवाली में व्यवसायियों के संस्थान से निकला केले का तना गाड़ दिया है। चंद कदम की दूरी पर जोन क्रमांक 7 का दफ्तर है पर किसी को कोई मतलब ही नही है। स्थिति मरता है कोई तो मर जाये जैसी है।
साढ़े 400 करोड़ खर्च करने के बाद भी दो साल में पूरा होने वाला पूर्व मंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट 16 साल भी आधा अधूरा पड़ा है। दावा शहर को गन्दगी और मच्छर मुक्त कराने का था पर न गन्दगी गई और न मच्छरों से निजात मिल सकी। ऊपर से बेस खत्म होने के कारण सड़के पिछले 16 साल से कही भी धंस जा रही।
करीब 15-20 दिन पूर्व अपोलो होस्पिटल रोड की सड़क पर गोल गड्ढा हो गया। निगम के अफसर तो चेम्बर से निकलकर देखते नही इसलिए मोहल्लेवासियों ने इस गड्ढे में केले के पौधे का तना गहरे गड्ढे में गाड़ दिया। उनका कहना है कि दिन में तो उतनी दिक्कत है नही पर रात में स्ट्रीट लाइट जलती नही घुप्प अंधेरा रहता है कोई हताहत न हो इसलिए वे लोग समय- समय पर कभी केले का तना तो कभी चिथड़े का झंडा टांग लोगो का ध्यान आकृष्ट कराने प्रयास करते है इतना ही नही लोगो को दूर से नजर आए इसलिये रात को अपने घर को लाइट जला सड़क को रौशन भी करते है ताकि किसी घर का चिराग न बुझे।

ये दूसरी झांकी 10 करोड़ की सफाई का है आप भी देख लीजिए कैसे अपोलो हॉस्पिटल और लिंगियाडीह चौक के बीच सड़क तक गन्दगी और कचरा पसरा है। कूड़े के ढेर पर पूरे दिन मवेशियों के जमावड़ा रहता है सो अलग।
इन कम्पनियों के दावा था कि उनका काम शुरू होने के बाद शहर की सड़कों पर कागज का टुकड़ा तक नजर नही आएगा यहां कचरे और चीथड़ों का भंडारा सड़क तक बिखरा है।
निगम के अफसरों और जनप्रतिनिधियों का दावा था कि शहर सीमा से लगे 3 निकायों और 15 ग्राम पंचायतों को निगम की सीमा में शामिल करने से शहर को बी ग्रेड सिटी का दर्जा मिलेगा केंद्रीय शहरी मंत्रालय से शहर विकास के लिए करोड़ो का फंड आएगा पर सब कोरा बकवास निकला। जिससे नागरिकों में रोष है।
तो क्या होगा
इस गड्ढेदार रॉड से रोजाना न सिर्फ हजारों लोगों का आनाजाना है बल्कि दिन भर अपोलो में एम्बुलेंस का आवागमन भी होता है। सवाल यह उठ रहा कि यदि ऐसे में कोई बड़ी अनहोनी होती है तो आखिर इसका जिम्मेदार कौन होगा। सवाल नागरिकों की जान का है।
नजारा आम है
शायद ही शहर का कोई नागरिक होगा जिसने सड़को पर आए दिन गड्ढे होने पर उन गड्ढों में चिथड़े का झंडा लहराते न देखा हो। शहर में जगह- जगह ये नजारा आम है पर नही दिखता तो सिर्फ प्रशासन के जिम्मेदार अफसरों को।
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