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आंधी बारिश से बिजलीं व्यवस्था फिर चरमराई, शहर में अंधेरा मचा आक्रोशित भीड़ ने कही पथराव तो कही घेराव कर निकाला भड़ास, बोले रोज का तमाशा पीने का पानी तक नही जीना हुआ मुहाल…

बिलासपुर/ हल्की आंधी बारिश से चरमराई विधुत व्यवस्था को लेकर आक्रोश पनपने लगा है। ये आक्रोश जिम्मेदार अफसरो के बजाय 5-7 हजार मासिक पर काम करने वाले ठेका कर्मियों को झेलना पड़ रहा। सोमवार- मंगलवार रात फिर लगभग आधे शहर की बिजलीं ठप रही। आक्रोशित भीड़ ने जहा राजकिशोर नगर सबस्टेशन के फ़्यूजकाल सेंटर पर गाली गलौजकर जमकर पथराव किया, वही नेहरू नगर जोन मुख्यालय से घेराव व चक्काजाम की खबर है।
शहर की चरमराई विद्युत व्यवस्था, स्मार्ट मीटर के अनाप- शनाप बिजलीं बिल, बिजलीं दर में बढ़ोतरी और ऊपर से बिल की अदायगी न करने पर परडे के जुर्माने के ऐलान से पब्लिक पहले से हलाकान है। सोमवार को फिर महज 10 मिनट के आंधी तूफान और बारिश के चलते बिजलीं ठप हो गई। इससे नाराज नागरिकों ने जगह जगह गुस्से का इजहार किया।
मोपका नहर रोड, लोयला स्कूल रोड, राजीव विहार, पाटिलीपुत्र नगर, गीता विहार, शिवम सिटी, जॉब इन्क्लेव,बंसोर मोहल्ला सरकंडा समेत अरपापार के लगभग आधे से ज्यादा इलाके की बिजलीं कही 4 तो कही शाम 6 बजे से ठप होने के कारण राजकिशोर नगर सबस्टेशन के फ़्यूजकाल सेंटर में लोगो की भीड़ लगी रही, इसी दौरान पहुँचे 10-12 लड़को ने कब आएगी बिजलीं रोज का तमाशा हो गया कहते हुए गाली गलौच और पथराव किया जिससे ड्यूटीरत ठेका कर्मियों को काम छोड़ भागना पड़ा।
ठेका कर्मियों ने बताया कि
लिंगियाडीह स्टेडियम सबस्टेशन के पास 33 केबी लाइन टूटने के कारण बिजलीं बन्द है।
इतने बड़े क्षेत्र के विद्युत व्यवस्था के सुधार के लिए महज दो गाड़ी और 5 ठेका कर्मी है जो अपनी क्षमता से सुधार कार्य कर रहे है।
राजकिशोर नगर काल सेंटर में 466 ऑनलाइन कॉल, मिस कॉल समेत लगभग 800 कॉल आये और अब भी आ रहे सबका एक ही सवाल कब आएगी बिजलीं क्या फाल्ट है।
वही जरहाभाठा सिंधी कॉलोनी एवं भक्त कंवरराम नगर क्षेत्र में फिर शाम 4 बजे से बिजली आपूर्ति बाधित होने से
धंधा पानी, पेयजल आपूर्ति सब ठप होने से आक्रोशित नागरिकों द्वारा नेहरू नगर बिजली दफ्तर के घेराव व चक्काजाम की खबर है। प्रदर्शन की सूचना पर मौके पर सिविल लाइन टीआई ने आक्रोशित नागरिकों को शांत करा आश्वस्त कराया कि वे बिजलीं अफसरो से
चर्चा कर शीघ्र बिजली आपूर्ति बहाल कराने प्रयास करेंगे। कुछ ही देर में बिजली आपूर्ति बहाल हुई तो प्रदर्शनकारी लौट गए।

दुबर ल दू उसाढ़, ऊपर ले चार्जिंग के मार


शहर में रोज घर काम्प्लेक्स बन रहे है, नई कॉलोनियां तन रहे, गर्मी में एसी, कूलर चल रहे, घरों-घर 4-4, 6-6 मोबाइल चार्ज हो रहे अब ऊपर से इलेक्ट्रिक ऑटो और गाड़ियां आ गई जिनके चार्जिंग में बड़ी मात्रा में बिजलीं कई खपत हो रही जिसके कारण ये दिक्क्त आ रही ये कहना है बिजलीं कर्मियों का।

का करे साहब औ का करै ठेका कर्मी

चरमराई विद्युत व्यवस्था सरकार के निजीकरण के दावे की सबसे बड़ी सच्चाई है। दावा था कि इससे व्यवस्था सुधरेगी पर पूरी तरह चरमरा गई। बिजलीं अफसर पहले ही अवगत करा चुके की वे कुछ नही कर सकते, साढ़े 13 हजार से अधिक कर्मचारी रिटायर हो गए मर गए पर उनकी जगह नई भर्ती हुई नही। अब महज 5000 कर्मचारी बचे है। सरकारी विभागों में ठेकेदारी कौन और किसके एप्रोच से कर रहे कितने कर्मियों का ठेका है कितनी गाड़ी देनी है, कितने कर्मचारी और गाड़ी दे रहे है ये किसी से छिपा नही है।

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शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
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