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बूथ मजबूत व्यवस्था कमजोर, ट्रिपल इंजन की सरकार में चिकित्सा व्यवस्था का हाल बेहाल, 18 घण्टे के इलाज का मौत के बाद पौने 5 लाख का बिल, आदिवासी की लाश को बंधक बनाने ,पेट मे धागा छोड़ने और अपोलो की मनमानी पर सीएमएचओ उवाच…

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बिलासपुर / बूथ तो मजबूत रहा पर ट्रिपल इंजन की सरकार में प्रशासनिक व्यवस्था में वो मजबूती दिखाई नही दे रही…! अब स्वास्थ्य महकमे की मुखिया की विवशता देखिये वे मान रही कि 18- 19 घण्टे में 4 लाख 60 लाख का बिल गलत है। वे ये भी मान रही कि शासन के आदेश और उनके रिमाइंडर के बाद भी निजी हॉस्पिटल संचालक रेट लिस्ट नही लगा रहे, अपोलो की मनमानी पर भी वे विवश है और बता रही कि प्रबंधन ने किन किन सेवाओ को अपनाया है। पर सवाल यह उठ रहा कि जब इतने गम्भीर मामले में वो भी संभागीय जिला मुख्यालय के एक निजी अस्पताल की करतूत को शिकायत न मिलने की बात कहकर टाल रहे तो जिनमे शिकायते हुई उनमें क्या करेंगे ये बड़ा सवाल है।

प्रदेश के सबसे दूसरे बड़े शहर, महानगर, स्मार्ट सिटी बिलासपुर और न्यायधानी के नाम गौरान्वित शहर की चिकित्सा व्यवस्था का हाल बेहाल है। सिम्स और जिला हॉस्पिटल होने के बाद भी।लोग अपने परिजनों की चिकित्सा के लिए अपने परिवार का पेट काटकर निजी संस्थानों में संपत्ति जेवर घ गहना रखकर या बेचकर इलाज कराने विवश है। अस्पताल के बिल के लिए मंगलसूत्र बेचवाने, सरकारी अस्पताल की क्लास वन स्त्रीरोग विशेषज्ञ द्वारा मरीज को नसबंदी के लिए निजी अस्पताल ले जाने और ऑपरेशन के दौरान मरीज की आंत तक काटने का मामला सामने आ चुका, जबकि दावा आयुष्मान योजना से निशुल्क इलाज का है।

एक दिन में 3 निजी अस्पतालों में 3 घटनाएं

तोरवा के पेंडलवार नर्सिंग होम में ऑपरेशन के दौरान पेट मे धागा छोड़ने, देवरीखुर्द मोड़ के पहले तोरवा पावर हाउस के आगे हरिओम होस्पिटल में पैसे के लिए आदिवासी की लाश को बंधक बनाने और व्यापार विहार के एलाइट हॉस्पिटल में हार्ट पेशेंट की मौत के बाद परिजनों को 18-19 घण्टे के इलाज का 4 लाख 60 हजार रुपये का बिल थमाने ये तीनो घटनाएं एक ही दिन हुई जो बेहद ग़म्भीर है।

तो क्या गब्बर की दरकार…?


सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों के बावजूद अंचलवासी अपने और अपने परिजनों की चिकित्सा के लिए खून के आंसू रो रहे है…? जिससे लगता है कि अब अच्छी और सच्ची स्वास्थ्य सेवाओं के लिए न्यायधानी के लोगो को गब्बर की दरकार है।


और अपोलो पर cmho क्या कह रही आप खुद सुनिए….

डॉ शुभा गरेवाल, cmho बिलासपुर

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