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डीजीपी के बयान ने कालसर्प दोष फर्जी स्नेक बाइट मुआवजा कांड से जुड़े अफसरो में मचाई धुकधुकी, कहा विशेष एजेंसी से जांच कराने भेजा प्रस्ताव,,, कानून से गिल्ली डंडा खेलने वाले संलिप्त अफसर फिर सकते में…

बिलासपुर / न्यायधानी के साढ़े 17 करोड़ के चर्चित नागलोक फर्जी मुआवजा कांड में छत्तीसगढ़ के पुलिस सुप्रीमो DGP अरुण देव गौतम के बयान ने अब तक कानून से गिल्ली डंडा खेल बचने का प्रयास कर रहे दोषी अफसरो की धुकधुकी बढ़ा दी है। उन्होंने मामले को गंभीर बताते हुए आर्थिक अनियमितताओं की जांच के लिए विशेषज्ञ एजेंसी से जांच का प्रस्ताव भेजने की बात कही है।

बताया जा रहा कि अब इस बहुचर्चित घोटाले की जांच EOW को सौंपे जाने की तैयारी है। उन्होंने अब तक कि जांच और मामले में कई गई 21 आरोपियो की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस कार्रवाई की तारीफ की है।
फिर जांच की जरूरत क्यो… उन्होंने इस संशय का भी जवाब दिया है कि आर्थिक गड़बड़ी से जुड़े पहलुओं की जांच और बेहतर तरीके से हो सकेगी।

ये है मामला, बेलतरा विधायक ने किया उजागर

जशपुर में पिछले तीन साल में सर्पदंश से 96 मौतें दर्ज हुई हैं। वहीं, अकेले बिलासपुर में 431 मौतें दिखाकर 17 करोड़ 24 लाख रुपए का मुआवजा बांट दिया गया। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने यह मामला विधानसभा में उठाया था, जिसके बाद काफी हंगामा हुआ। इसके बाद राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया। सरकारी नियमों के अनुसार सर्पदंश से मौत होने पर मृतक के परिजनों को 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है। जांच में सामने आया कि इसी योजना का गलत फायदा उठाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। कई सामान्य मौतों को भी सर्पदंश से हुई मौत बताकर मुआवजा ले लिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में पूरा खेल अफसरो से मिलीभगत कर बिना परिजनों की जानकारी या सहमति के बिना ही खेला गया मुआवजे की राशि निकाल कर आरोपियों ने रकम को आपस में बांट डाला।

अब तक 21

बताया जा रहा कि नागलोक फर्जी स्नेक बाइट मुआवजा घोटाले में अब तक डॉक्टर, नगर सैनिक और तहसील कर्मचारियों समेत 21 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच में सामने आया है कि ‘एडवोकेट डायमंड गैंग’ में पुलिस, स्वास्थ्य और राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शामिल थे। अस्पताल में किसी की मौत की सूचना मिलते ही गैंग सक्रिय हो जाता था। इसके बाद सर्पदंश से मौत का फर्जी केस तैयार कर करीब 1.5 लाख रुपए में मुआवजे की सेटिंग की जाती थी।

लू में भी घोटाले का पहाड़

छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रस्तुत हालिया आंकड़ों के मुताबिक गत 5 वर्षों में लू से मौत के 93 मामलों में से 90 मामलों में राहत राशि बांटी गई, जिसमें अकेले बिलासपुर संभाग से 85 मामले जुड़े होने पर भारी राजनीतिक विवाद और कथित मुआवजे की बंदरबांट के आरोप सामने आए हैं।

माला डेली वेजेस ड्राइवर के गले, तो साहेब कितने मजबूत

सरकारी घोटालों की जांच में बकरा नही तो रखिया, रखिया नही तो नींबू के बलि देने की प्रथा चली आ रही,,, इस मामले में भी चर्चित तहसीलदार के ड्राइवर को बलि का बकरा बना उसे ही पूरे मामले का मास्टर माइंड होना और उसके खाते में 5 लाख के ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के सबूत मिलने का दावा किया गया। सवाल यह उठ रहा कि निगम प्रशासन से उधार में मिले ठेकेदार के 8- 10 हजार पारिश्रमिक पाने वाले साहेब का जब इतना जलवा है तो तहसीलदार का कितना होगा इसका तो थाह पाना मुश्किल है।

अब कुछ होगा कि शिव भोला भंडारी

इस अति ग़म्भीर मामले में जांच और कार्रवाई का तमाशा देखकर ऊब चुकी पब्लिक पूछ रही कि पुलिस की जांच मे छोटी मछलियां तो पकड़ी गई पर अब क्या एजेंसी के जांच में एनाकोंडा तक जांच एजेंसी के हाथ पहुचेंगे या सब बमबम हो जाएगा…

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शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
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