

0 डिजिटल इंडिया का शोर तो फिर क्यो आवेदनों में कर रहे बोर

0सिस्टम पर उठ रहे सवाल क्या देख रहे जिम्मेदार
बिलासपुर/ छत्तीसगढ़ के जिस पीडीएस और वन नेशन वन राशन का देश भर में ढिंढोरा पीटा जा रहा उसका क्या हाल है आप भी जान लीजिए। शासन- प्रशासन ने राशन दुकान संचालको पर ये स्किम तो लाद दी, पर व्यवस्था नही बनाई, नतीजतन राशन दुकानों में खाद्यान्न का टोंटा पड़ा है, कार्डधारी सप्ताह- दस दिन से उचित मूल्य दुकानों के चक्कर काटने विवश है क्योंकि अतिरिक्त आबंटन का आवेदन भटक गया चावल स्टॉक में है ही नही।
सीजीडीएन न्यूज़ की टीम ने शनिवार- रविवार को चाँटीडीह और राजकिशोर नगर के राशन दुकानों का भृमण कर जायजा लिया तो पता चला कि ज्यादातर उचित मूल्य की दुकानों में चावल ही नही चावल खत्म हो गया है
उचित मूल्य दुकान संचालको ने बताया कि वन नेशन वन राशन स्कीम के तहत कही के भी कार्डधारी किसी भी राशन दुकान से राशन ले सकते है। कई परिवार किराए के मकान को छोड़कर दुसरे जगह रह रहे, कुछ लोग गांव से यहां शहर आकर रहते है वे भी राशनकार्ड एंट्री करा राशन ले जा रहे, वे नियमानुसार अतिरिक्त आबंटन के लिए फ़ूड कंट्रोलर के नाम आवेदन भी कर रहे लेकिन आबंटन की प्रक्रिया इतनी ढीली और लचर है कि खाधान्न मिल ही नही रहा वे कार्डधारकों को राशन दे तो कहा से दे और कैसे दे।
ये है दावा
एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड (One Nation, One Ration Card – ONORC) भारत सरकार की एक ऐसी योजना है जिसके तहत लाभार्थी देश की किसी भी उचित मूल्य की दुकान (राशन की दुकान) से अपने हिस्से का रियायती राशन ले सकते हैं। इतना ही नही दीगर जिले ही नही दीगर राज्य के राशन कार्ड से खाद्यान्न प्रदाय करने का दावा है। ताकि रोजगार या अन्य कारणों से दूसरे जिलके या राज्य के प्रवासी मजदूर लाभान्वित हो सके उनका हक न मारा जाय।



