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2 माह से पेमेंट नई हे, 6 माह से टेंडर, शराब रखने जगह नहीं पुट्ठों (पेकिंग के खाली काटून) से खचाखच भर गए गोदाम…!

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बिलासपुर/ गम का दौर हो या हो खुशी शमा बांधती है शराब… पर दारू भट्टी के गार्ड, सेल्समेन और स्टाफ खुद गम और संकट के दोहरे जाल से घिरे है। एक तो 2 माह से आउटसोर्सिंग bsi ( बॉम्बे इंटीग्रेटेड सिक्यूरिटी आई लिमिटेड) उन्हें पारिश्रमिक पेमेंट नही कर रहा, वही शराब के डब्बे (पैकिंग कार्टून) का 6 माह से टेंडर ही नही हो रहा नतीजतन पूरा गोदाम कार्टून(पैकिंग पुट्ठे) से भरा है, अब संकट ये है कि वेयर हाउस से भेजे गए शराब को रखे तो रखे कहा क्योकि गोदाम तो पुट्ठे से भरे है…!
CGDNA न्यूज़ की टीम ने शहर के शराब भट्टियों का भृमण कर स्टाफ से चर्चा कर हालचाल जानने का प्रयास किया,,, जैसे ही बात छेड़ी निर्बल… बेबस 10 -12 हजार के कर्मचारियों का दर्द फुट पड़ा।

शराब भट्टियों के दुखी दंडी स्टाफ ने बताया कि पहले घ्र माह पेमेंट मिल जाता था, पर दो माह हो गए आउटसोर्सिंग कम्पनी ने दो माह से उनका पारिश्रमिक रोक रखा है,,, वे रोज पेट्रोल के लिए उधार लेकर इस आस में ड्यूटी आ रहे है कि आज पेमेंट आ जायेगा।
6 माह से शराब के पैंकिग कार्टून का टेंडर ही नही किया जा रहा, पूरा गोदाम पुट्ठे से भरा पड़ा है ऐसे में वे वेयर हाउस से आने वाले शराब को कहा रखे…

स्टाफ का भी टोंटा

शराब भट्टियों के स्टाफ ने बताया कि ये हालात तब है जब कर्मचारियों की छटनी कर स्टाफ की संख्या को कम कर दिया गया। नियम से छोटे शराब दुकानों में 3 तो बड़े में 6 सेल्समेन और कम से कम चार- चार गार्ड होने चाहिए लेकिन सभी जगह सेल्समेन हर गार्डों का टोंटा है।

आखिर क्या है खेल

बताया जा रहा कि इसमें भी बड़ा झोल है, काटून में पैक शराब की शीशियों को अलग निकालकर बेचने के बाद बड़ी तादात में काटून जमा हो गए जिन्हें गोदामो में पिछले छह सात माह से ठूंस- ठूंस कर भरा गया है, अब आलम यह कई कि वेयरहाउस से पहुचने वाली शराब की आने वाली खेप को रखने गोदाम में जगह ही नही है। काउंटर कक्ष से लेकर बाथरूम तक शराब रखे गए है, कमोबेश सभी शराब भट्टियों के यही हालात बताए जा रहै। खबर है कि कबाड़ कारोबारियो से मांडवाली जम नही पा रहा संकट इसी बात का है…?

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