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बाबा भुसरूंग, वन टू का फोर नहीं हो गया 2940 स्क्वेयर फिट, रजिस्ट्री पेपर में 540 वर्गफुट भूखंड का उल्लेख

0दिया गया आवासीय भूखण्ड का स्थाई पट्टा, किराए पर दे दिया निजी बैंक को
0 भवन अनुज्ञा में थर्ड फ्लोर में पेंट हाउस ढलवा दिया लेंटर

निगम के भवन शाखा अधिकारी का गौरवपथ-उसलापुर बाईपास मोड़ पर 2 मंजिल और पेन हाउस की अनुमति पर 2 मंजिला भवन

बिलासपुर। एक्ट से नही पद पॉवर और नेताओं की सरपरस्ती पर चल रहा नगर निगम। तभी तो भवन शाखा अधिकारी ने पॉश एरिया में मेनरोड पर आबंटित आवासीय पट्टे के भूखण्ड पर भवन अनुज्ञा के विपरीत तीन मंजिला भवन तान दिया। पूरे मामले में दिलचस्प बात यह है कि यहां आवासीय पट्टे के पंजीयन में 540 स्क्वेयर भूखण्ड दर्शाया गया है, पर नक्शे में 2940 स्क्वेयर फिट का उल्लेख है। ये भी जादू से कम नहीं पर उच्चाधिकारियों व नेताओ की सरपरस्ती में दुसरो पर नियम कायदे का डंडा चलाने वाले भवन शाखा अधिकारी का भी जादू कुछ कम नही। तभी तो नवम्बर 2023 में नक्शा पास होने के बाद भी नियमितीकरण भी हो गया। जबकि 14 जुलाई 2022 के पूर्व अस्तित्व में आ चुके भवनों का ही नियमितीकरण करने का आदेश है।

रजिस्ट्री पेपर

   नक्शे की प्रति


जादू ऐसा कि सत्ता परिवर्तन हो गया । निजाम बदल गए आवास एवं शहरी मंत्रालय और नगरीय प्रशासन मंत्रालय के फोर्टफ़ोलियो वाले सेंट्रल और स्टेट के दो-दो मंत्री यही से है, बावजूद इसके नियम कानून को ऐसे तोड़ने मरोड़ने और मनमानी करने वाले जिम्मेदार अफसर का अभी तक बाल बांका नही हुआ।
इसके अलावा तोरवा देवरीखुर्द मोड़ के पहले भी एक भवन के नियमितीकरण का मामला भी लगातार मीडिया की सुर्खियों में रहा इस भवन में अभी भी बांस बल्ली लगे है निर्माण कार्य चल ही रहा बावजूद इसके इस भवन के मालिक को गत 28 दिसम्बर 2023 को नियमितीकरण का प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया।


इतनी हिम्मत


टीएनसी और निगम के चर्चित अफसर को जरा भी भय नही। आप खुद देखिए कैसे बेखौफ होकर खेल खेला गया कि सरकार तो रिपीट हो रही बना लेंगे, पर सत्ता परिवर्तन हो गया। 13 दिसम्बर 2023 को सुशासन के दावे वाले विष्णुदेव साय ने शपथ लेकर मुख्यमंत्री पड़ के8 कमान संभाली और इसके महज 15 दिन बाद तोरवा के उस चर्चित अभी तक निर्माणाधीन भवन के मालिक को 28 दिसम्बर 2024 को नियमितीकरण का सर्टिफिकेट तक जारी कर दिया गया।


लंबा खेल


आरोप है कि नियमितीकरण में लाखों नही करोड़ो रुपये का वारा न्यारा हुआ है। तत्कालीन कांग्रेस शासनकाल मे जारी आदेश के तहत 14 जुलाई 2022 के पूर्व अस्तित्व में आये यानी बनकर तैयार हुए ऐसे भवनों का नियमितीकरण किया जाना था जो बिना अनुमति या अनुमति के विपरीत बना लिए गए है। नियमितीकरण के लिए 9500 आवेदन आये इनमे से 4900 आवेदकों से शुल्क लेकर उनके भवनों को नियमित किया गया। जिससे शासन को 28 करोड़ की आय हुई तो सोचिए झोल कितने करोड़ का हुआ होगा। वही 4600 आवेदनों को विधानसभा फिर लोकसभा चुनाव के आचार संहिता का हवाला देकर लटका दिया गया, और फिर इनको नोटिस जारी करने का खेल खेला गया।

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शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
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