
बिलासपुर। या तो इंटेलिजेंस फेलियर है या पुलिस और प्रशासन की नरमी जिसके चलते बुधवार देर रात तक कलेक्ट्रेट घिरा रहा आंदोलनकारियों के बाद यहां पुलिस अफसरों और फोर्स का डेरा रहा।
मामला फिलिस्तानी झंडे के मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों को रिहा कराने के लिए दबाव बनाने का है ।जिसके चलते न्यायधानी और शांति का टापू कहलाने वाले शांत शहर का माहौल गरमाया रहा। सवाल यह उठ रहा कि लगातार इस तरह का प्रयोग क्यो।


इस तरह का यह पहला मामला नही इससे पहले भी एक समाज के लोग इसी तरह का माहौल खड़ा कर चुके है। आवश्यकता इस बात की है कि प्रशासन लगातार बिगड़ रहे माहौल के मद्देनजर ठोस कदम उठाये।

नाराजगी का नजारा हमने इसलिए कैमरे में कैद नही किया कि सिपाही की नौकरी खतरे में न आये जिसने मल्टी लेवल पार्किंग में यह कहकर लाठी पटक दी कि अब अन्याय बर्दास्त नही होता कमजोर प्रशासन के कारण गाड़िया आई अफसर और जवानों को बुलाना पड़ा मेरा वेतन इतना है और अफसर भी है इससे प्रदेश सरकार को 1 करोड़ का अतिरिक्त खर्चा पड़ा है।
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