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रजिस्ट्री के साथ नामांतरण के पायलट प्रोजेक्ट के ढिंढोरे का भी ये हाल, बिलासपुरियंस को करना होगा इंतजार, अभी नही मिलेगी पटवारी, तहसीलदार के चक्कर से निजात

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने रजिस्ट्री के साथ नामांतरण का ढिंढोरा तो पीट दिया पर हकीकत ये है कि ये पायलट प्रोजेक्ट अभी केवल 3 जिलो में लागू है, इनमे राजधानी रायपुर के केवल नया रायपुर, बलौदाबाजार और आरंग शामिल है। बिलासपुर समेत अन्य सभी जिलों में अभी जमीन मकान खरीदने वालों को नामांतरण के लिए तहसीलदार पटवारियो के चक्कर से फिलहाल निजात नही मिली है और कब तक मिलेगी ये भी तय नही है। ये लोगो को जान लेना चाहिए।


गत 3 मई को छत्तीसगढ़ सरकार ने तामझाम के साथ जब इस पायलेट प्रोजेक्ट के शुरुआत की घोषणा की तो आमजन में खुशी की लहर दौड़ गई कि अब उन्हें जमीन और मकान की खरीदी के बाद नामन्तरन के लिए तहसीलदार, पटवारी के चक्कर नही काटने पड़ेंगे, खरीदी के बाद रजिस्ट्रार द्वारा स्वतः सिस्टम से उनके खरीदे गए जमीन मकान का नामन्तरण हो जाएगा।


सीजीडीएनए की टीम ने जिला पंजीयक कार्यालय में जब इसको लेकर डिस्ट्रिक रजिस्ट्रार से चर्चा की तब उन्होंने बताया कि ये पायलट प्रोजेक्ट अभी बिलासपुर में लागू ही नही हुआ है, अभी केवल नया रायपुर, बलौदाबाजार और आरंग में शुरू हुआ है।

ये है स्थिति

वित्तीय वर्ष 2024-25 में शासन ने जिला पंजीयन कार्यालय को 350 करोड़ के राजस्व का लक्ष्य दिया था। जिसके एवज में 31 मार्च 2025 तक विभाग ने 316 करोड़ के राजस्व की प्राप्ति की।


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रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण का पायलट प्रोजेक्ट अभी नया रायपुर, आरंग और बलौदाबाजार जिले में लागू हुआ है। बिलासपुर के लिए अभी कोई गाइडलाइन नही आया है, यहाँ कब होगा बता पाना सम्भव नही है, जब आदेश आएगा यहाँ भी पायलट प्रोजेक्ट लागू कर दिया जाएगा।
आर के स्वर्णकार डिस्ट्रिक रजिस्ट्रार, बिलासपुर, छत्तीसगढ़

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शैलेन्द्र पाण्डेय / संपादक / मोबाइल नंबर : 7000256145
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